AAP नेता सत्येंद्र जैन को कोर्ट से बड़ी राहत, STP घोटाले में 2 लाख के मुचलके पर मिली जमानत
दिल्ली की राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। दिल्ली जल बोर्ड के कथित STP घोटाले में गिरफ्तार आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को राऊज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। विशेष पीसी जज दिग विनय सिंह ने जैन की जमानत याचिका मंजूर करते हुए उन्हें 2 लाख रुपये के मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया है। जैन को 18 अगस्त को एंटी-करप्शन ब्यूरो ने कथित अनियमितताओं और टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर के आरोप में गिरफ्तार किया था।
2024 में दर्ज हुआ था मामला
सत्येंद्र जैन को गिरफ्तारी के अगले दिन यानी 19 अगस्त को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के साथ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420, 409, 418 और 120बी के तहत FIR दर्ज की गई थी। यह मामला दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत के आधार पर मई 2024 में दर्ज किया गया था, जिसमें दिल्ली जल बोर्ड के STP के विस्तार और अपग्रेडेशन से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।
टेंडर में हेरफेर का लगाया गया आरोप
जांच एजेंसी का आरोप था कि टेंडर की तकनीकी शर्तों को इस तरह तैयार किया गया था कि एक विशेष तकनीक प्रदाता कंपनी, मेसर्स यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड, को फायदा मिल सके। ACB के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया को जानबूझकर टेक्नोलॉजी-केंद्रित बनाया गया, जिससे प्रतिस्पर्धा सीमित हुई और एक निजी संस्था को कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचा। मामले में आपराधिक साजिश और टेंडर शर्तों में हेरफेर के आरोप भी लगाए गए थे।
STP की क्षमता बढ़ाने पर भी सवाल
जांच एजेंसी ने सत्येंद्र जैन पर आरोप लगाया था कि बिना किसी तकनीकी व्यवहार्यता अध्ययन के रोहिणी STP की क्षमता को 15 मिलियन गैलन प्रतिदिन से बढ़ाकर 30 MGD करने का फैसला किया गया। आरोप के अनुसार, इससे परियोजना की लागत करीब 123 करोड़ रुपये तक बढ़ गई। ACB ने मामले में कथित कमीशन की रकम को बिचौलियों के जरिए अलग-अलग आरोपियों के बैंक खातों तक पहुंचाए जाने का दावा करते हुए मनी ट्रेल की बात भी कही थी।
जमानत से मिली बड़ी राहत
राऊज एवेन्यू कोर्ट के जमानत आदेश के बाद सत्येंद्र जैन को इस मामले में फिलहाल बड़ी राहत मिली है। हालांकि, जमानत मिलना आरोपों से बरी होना नहीं है और मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी। STP परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया, कथित वित्तीय लेनदेन और अन्य आरोपों को लेकर जांच एजेंसियों का पक्ष आगे की कार्यवाही में महत्वपूर्ण रहेगा।