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धर्म

Janmashtami 2026: कल मनाई जाएगी जन्माष्टमी, नोट कर लें व्रत के नियम और शुभ मुहूर्त

By dolly singh
September 3, 2026 2 Min Read
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Janmashtami 2026: जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस बार जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए इस दिन निशीथ काल में पूजा और कान्हा के जन्म का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त रात के शुभ मुहूर्त में बाल गोपाल का जन्म कराकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।

जन्माष्टमी पूजा में इन चीजों की होगी जरूरत

जन्माष्टमी की पूजा के लिए श्रीकृष्ण की मूर्ति या तस्वीर, झूला या सिंहासन, पीले वस्त्र, मुकुट, मोरपंख, बांसुरी, वैजयंती माला, चंदन, रोली, अक्षत, अष्टगंध और तुलसी के पत्ते जैसी सामग्री पहले से तैयार रखना शुभ माना जाता है। इसके अलावा पंचामृत के लिए दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल की जरूरत होगी। पूजा में माखन-मिश्री, खीर, धनिया पंजीरी, पंचमेवा और मौसमी फलों का भोग भी लगाया जा सकता है।

व्रत रखने से पहले कर लें ये जरूरी तैयारी

जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को एक दिन पहले से ही सात्विक आहार लेने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत से पहले लहसुन-प्याज, मांसाहार और शराब जैसे तामसिक पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए। पूजा स्थल की साफ-सफाई करने के साथ अगले दिन की सभी पूजन सामग्री भी पहले से जुटा लेना बेहतर रहता है, ताकि व्रत और पूजा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।

इस साल मनाया जाएगा 5253वां जन्मोत्सव

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का अवतार द्वापर युग में मथुरा के कारागार में हुआ था। उनके माता-पिता देवकी और वसुदेव थे, जबकि उनका पालन-पोषण नंद बाबा और माता यशोदा ने किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस बार भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। जन्माष्टमी पर देशभर के मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और आधी रात को भगवान के जन्मोत्सव का आयोजन किया जाएगा।

जन्माष्टमी 2026 व्रत शुभ मुहूर्त?

अष्टमी तिथि की शुरुआत 4 सितंबर को रात को 2:25 से शुरू होकर इसका समापन 5 सितंबर की रात 12:13 पर होगा. निशीथ काल की अष्टमी बड़ी महत्वपूर्ण बात है. 4 सितंबर को रात्रि लगभग 11:57 मिनट से लेकर 12:53 तक निशीथ काल का समय है. जहां पर जन्माष्टमी मनाई जाएगी. कृष्ण जन्माष्टमी में लोग व्रत रखकर इसका पारण भी करते हैं. कृष्ण जन्माष्टमी के व्रत का पारण 6 सितंबर की सुबह 6 बजे के बाद कर सकते हैं. साल 2026 में नंद उत्सव का कार्यक्रम 5 सितंबर को मनाया जाएगा.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. Khabar Nest इसकी पुष्टि नहीं करता है.

Tags:

Janmashtami 2026Religious News
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dolly singh

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