यमन में फिर छिड़ी खूनी जंग, 125 से ज्यादा मौतें; बाब-अल-मंडेब पर हूतियों की नजर
यमन में एक बार फिर हिंसा ने गंभीर रूप ले लिया है। सरकार समर्थक सेना और हूती विद्रोहियों के बीच पिछले हफ्ते शुरू हुई भीषण लड़ाई में अब तक 125 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है। एक सैन्य अधिकारी के मुताबिक, सरकारी सैनिकों और उनके सहयोगी बलों के 66 सदस्य मारे गए हैं, जबकि मेडिकल और सुरक्षा सूत्रों ने हूती पक्ष के कम से कम 62 लोगों की मौत की जानकारी दी है। झड़पों में एक नागरिक की भी जान गई है। हालांकि, सरकार और हूती विद्रोहियों ने अभी तक आधिकारिक तौर पर हताहतों का आंकड़ा जारी नहीं किया है।
लाल सागर के करीब हूतियों का बड़ा हमला
हूती विद्रोहियों ने गुरुवार को लाल सागर के तट के पास और ताइज क्षेत्र में जमीनी हमला शुरू किया। इस दौरान रॉकेट और ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया। सैन्य अधिकारियों का कहना है कि हूती रणनीतिक बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास के इलाकों पर पकड़ मजबूत करना चाहते हैं। इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाने की उनकी कोशिश पहले भी वैश्विक चिंता का कारण रही है। बाब अल-मंदेब स्वेज नहर के जरिए एशिया और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार का अहम रास्ता है।
मोखा बंदरगाह को घेरने की कोशिश का दावा
सरकारी सूत्रों का आरोप है कि हूती विद्रोही सरकार के नियंत्रण वाले मोखा बंदरगाह शहर को दूसरे इलाकों से अलग करने की कोशिश कर रहे थे। इसी के चलते जलडमरूमध्य के उत्तर में स्थित इलाकों में लड़ाई तेज हुई। सरकारी पक्ष का दावा है कि हूतियों ने लाल सागर और तटीय शहर अल-खोखा के पास ऊंचे इलाकों तथा ताइज शहर के आसपास कुछ महत्वपूर्ण स्थानों पर कब्जा किया है। इन रणनीतिक जगहों से समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने और जहाजों को निशाना बनाने की आशंका जताई जा रही है।
सरकार ने भेजी अतिरिक्त सेना
हूती हमलों का जवाब देने और खोए हुए इलाकों पर दोबारा नियंत्रण हासिल करने के लिए यमनी सरकार ने अदन से ताइज की ओर अतिरिक्त सैनिक भेजे हैं। बताया गया है कि यह कदम सरकार के प्रमुख सहयोगी सऊदी अरब के अनुरोध के बाद उठाया गया। फिलहाल हूतियों के पास बाब अल-मंदेब के ठीक ऊपर का कोई इलाका नहीं है, लेकिन मोखा के उत्तर में स्थित महत्वपूर्ण होदेइदा बंदरगाह शहर पर उनका नियंत्रण बना हुआ है। ऐसे में लाल सागर से जुड़े इलाकों में जारी संघर्ष का असर क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
2014 से जारी संकट ने फिर बढ़ाई चिंता
यमन वर्ष 2014 से लंबे समय तक सरकारी बलों और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष का मैदान बना रहा। सऊदी अरब के समर्थन वाली सरकारी सेना और हूतियों के बीच लड़ाई के बाद 2022 में युद्धविराम हुआ था, लेकिन इस साल जुलाई में हालात फिर बिगड़ गए। सऊदी अरब पर सना हवाई अड्डे पर हवाई हमले करने के आरोप भी लगे, जो हूती विद्रोहियों के नियंत्रण में है। इसके बाद से विद्रोहियों ने सरकारी और सैन्य ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं।
राजधानी पर हूतियों का कब्जा, मानवीय संकट गहराया
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कमजोर सरकार ने दक्षिणी शहर अदन में अपना आधार बनाया हुआ है, जबकि राजधानी सना समेत देश के बड़े हिस्से पर हूती विद्रोहियों का नियंत्रण है। हूतियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है। ताजा संघर्ष ने पहले से ही गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहे यमन के हालात और मुश्किल कर दिए हैं। लगातार बढ़ती हिंसा के बीच नागरिकों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार मार्गों को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ रही है।