PM मोदी के कार्यकाल में बदला डिजिटल इंडिया, UPI से लेकर DBT तक… हुए ये बड़े बदलाव
एक समय था जब बैंक में पैसे जमा करने, सरकारी दस्तावेज बनवाने या किसी सेवा के लिए आवेदन करने में घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता था। अब यही काम स्मार्टफोन की स्क्रीन पर कुछ मिनटों में पूरा हो जाता है। दुकान पर QR कोड से भुगतान हो या मोबाइल में जरूरी दस्तावेज रखना, डिजिटल तकनीक ने आम भारतीय की रोजमर्रा की जिंदगी को काफी हद तक बदल दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में डिजिटल इंडिया से जुड़ी कई पहलों का विस्तार हुआ, जिसमें सरकार के साथ-साथ नियामकों, बैंकों और तकनीकी संस्थाओं की भी अहम भूमिका रही। प्रधानमंत्री के जन्मदिन 17 सितंबर के मौके पर आइए नजर डालते हैं भारत के डिजिटल बदलाव के इस सफर पर।
UPI ने बदल दिया पैसे भेजने का तरीका
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI का पायलट लॉन्च अप्रैल 2016 में हुआ था। NPCI की ओर से विकसित इस भुगतान प्रणाली ने अलग-अलग बैंक खातों के बीच तुरंत पैसे भेजना आसान बनाया। मोबाइल नंबर, UPI ID या QR कोड के जरिए भुगतान की सुविधा ने डिजिटल ट्रांजैक्शन को आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना दिया। आज छोटी खरीदारी से लेकर बड़े भुगतान तक, UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
डिजिटल पेमेंट से बदली लेनदेन की आदत
UPI के साथ BHIM, RuPay और दूसरे डिजिटल पेमेंट सिस्टम ने भी कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा दिया। इसका असर बड़े कारोबार से लेकर छोटे दुकानदारों तक दिखाई देता है। सड़क किनारे चाय की दुकान हो, किराना स्टोर हो या ऑनलाइन शॉपिंग, डिजिटल भुगतान के विकल्प अब लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध हैं। इससे भुगतान के तरीके में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
DigiLocker ने दस्तावेजों को पहुंचाया मोबाइल तक
जरूरी कागजात को संभालकर रखने और हर जगह उनकी फोटोकॉपी ले जाने की जरूरत को DigiLocker ने काफी हद तक आसान किया। इस प्लेटफॉर्म के जरिए ड्राइविंग लाइसेंस, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और वाहन से जुड़े दस्तावेज जैसे कई रिकॉर्ड डिजिटल रूप में हासिल और सत्यापित किए जा सकते हैं। इससे कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम करने की दिशा में मदद मिली है।
जन-धन योजना से बैंकिंग सेवाओं का विस्तार
प्रधानमंत्री जन-धन योजना की शुरुआत 2014 में हुई थी। इसका उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं से दूर लोगों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ना था। बैंक खाते सरकारी लाभ, सब्सिडी और दूसरी वित्तीय सेवाओं तक पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम बने। आगे चलकर डिजिटल भुगतान और बैंकिंग सेवाओं के विस्तार ने इस वित्तीय ढांचे को और मजबूत किया।
UMANG ने सरकारी सेवाओं को किया मोबाइल के करीब
UMANG ऐप की शुरुआत 2017 में हुई थी। इसके जरिए कई सरकारी विभागों और सेवाओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की कोशिश की गई। मोबाइल फोन से विभिन्न सरकारी सेवाओं तक पहुंच मिलने से नागरिकों के लिए सरकारी कामकाज से जुड़ी कई प्रक्रियाएं आसान हुईं और डिजिटल माध्यम से सेवाओं की पहुंच बढ़ी।
डिजिटल हेल्थ से स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने देश में डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की दिशा में काम किया। इसके तहत ABHA यानी आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान उपलब्ध कराता है। सहमति आधारित व्यवस्था के जरिए स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में साझा करने की सुविधा भी इस बदलाव का हिस्सा है।
डिजिटल इंडिया बना बड़े बदलाव का आधार
2015 में शुरू किया गया डिजिटल इंडिया कार्यक्रम डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, ई-गवर्नेंस और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार से जुड़ा व्यापक कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य तकनीक के जरिए सरकारी सेवाओं को नागरिकों तक अधिक आसानी से पहुंचाना रहा है। समय के साथ डिजिटल सेवाओं का दायरा बढ़ा और इसका असर बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य, दस्तावेज और सरकारी सेवाओं जैसे कई क्षेत्रों में दिखाई देने लगा।
DBT से सीधे खाते में पहुंचा सरकारी लाभ
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT की शुरुआत 2013 में हुई थी, लेकिन बाद के वर्षों में इसका व्यापक विस्तार हुआ। इसके तहत सरकारी योजनाओं से मिलने वाले लाभ को सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में पहुंचाने की व्यवस्था की गई। इससे लाभ हस्तांतरण की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने और भुगतान को सीधे लाभार्थी तक पहुंचाने में मदद मिली।