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दुनिया

इटली में बुर्का-नकाब पर बैन की तैयारी, स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या भी होगी सीमित, PM मेलोनी ने किया ऐलान

By dolly singh
September 21, 2026 2 Min Read
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यूरोप में चेहरे को ढकने वाले परिधानों को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने संकेत दिया है कि उनकी सरकार स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक लगाने के साथ-साथ विदेशी छात्रों की संख्या को लेकर भी नए नियम लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित बदलावों का केंद्र स्कूलों में एकीकरण, भाषा सीखने और शिक्षा व्यवस्था में विदेशी छात्रों की भागीदारी से जुड़े मुद्दे हैं।

संसद में जल्द पेश हो सकता है नया बिल

जॉर्जिया मेलोनी ने अपनी पार्टी ‘ब्रदर्स ऑफ इटली’ के युवा संगठन ‘जियोवेंतू नाजियोनाले’ के फेस्टिवल ‘फेनिक्स’ में यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार संसद में ऐसा प्रस्ताव लाने वाली है, जिसमें एक कक्षा में विदेशी छात्रों की अधिकतम संख्या तय करने का प्रावधान होगा। इसके अलावा स्कूलों में बुर्का और नकाब जैसे चेहरे को पूरी तरह ढकने वाले परिधानों पर रोक लगाने का उपाय भी प्रस्तावित है।

विदेशी छात्रों के लिए भाषा सीखने पर जोर

प्रस्तावित योजना में उन विदेशी छात्रों के परिवारों को भी शामिल किया गया है, जिन्हें स्कूल और समाज में घुलने-मिलने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मेलोनी के मुताबिक, ऐसे मामलों में माता-पिता के लिए इतालवी भाषा सीखना अनिवार्य करने का प्रावधान लाया जा सकता है। सरकार का तर्क है कि भाषा की समझ बच्चों के सामाजिक और शैक्षणिक एकीकरण में अहम भूमिका निभाती है।

मेलोनी ने उठाया इतालवी बच्चों के अल्पसंख्यक बनने का मुद्दा

अपने भाषण में मेलोनी ने कहा कि ऐसी स्थिति स्वीकार्य नहीं हो सकती, जिसमें इटली के स्कूलों में इतालवी बच्चे खुद को अलग-थलग महसूस करें और अपनी ही कक्षा में अल्पसंख्यक हो जाएं। उन्होंने स्कूलों में बढ़ती विविधता और एकीकरण को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि केवल ‘इंटीग्रेशन’ शब्द का इस्तेमाल करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने इस मुद्दे को शिक्षा और सामाजिक समावेशन से जोड़कर पेश किया।

यूरोप में पहले से लागू हैं कई तरह के प्रतिबंध

चेहरा ढकने वाले परिधानों को लेकर यूरोप के अलग-अलग देशों में अलग-अलग नियम लागू हैं। फ्रांस और बेल्जियम में सार्वजनिक स्थानों पर चेहरे को पूरी तरह ढकने पर प्रतिबंध से जुड़े कानून पहले से मौजूद हैं, जबकि ऑस्ट्रिया में स्कूलों से संबंधित नियम भी लागू किए गए हैं। हालांकि, प्रत्येक देश में इन नियमों का दायरा और कानूनी आधार अलग है। इटली में प्रस्तावित कानून आने के बाद इस मुद्दे पर वहां भी राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज होने की संभावना है।

इटली में प्रवासन और एकीकरण बड़ा राजनीतिक मुद्दा

भूमध्यसागर के रास्ते यूरोप पहुंचने वाले प्रवासियों के कारण इटली में प्रवासन लंबे समय से महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा रहा है। खासकर मुस्लिम-बहुल देशों से आने वाले प्रवासियों के सामाजिक एकीकरण, धार्मिक प्रतीकों, नागरिकता और भाषा को लेकर बहस जारी है। मेलोनी सरकार का प्रस्ताव इसी व्यापक बहस के बीच सामने आया है। हालांकि, अंतिम नियम क्या होंगे और संसद में प्रस्ताव किस रूप में पारित होगा, यह विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

Tags:

Giorgia MeloniItaly
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dolly singh

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