बाबा महाकाल को चढ़ाए 2.70 लाख रुपये के मियाजाकी आम, अनोखी भक्ति ने खींचा सबका ध्यान
आस्था का स्वरूप केवल धन-दौलत या सोने-चांदी तक सीमित नहीं होता, बल्कि सच्ची श्रद्धा अपने सबसे अनमोल उपहार को ईश्वर के चरणों में समर्पित करने में दिखाई देती है। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में ऐसा ही एक अनोखा दृश्य देखने को मिला, जब जबलपुर से आई एक महिला श्रद्धालु ने बाबा महाकाल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों रुपये कीमत वाले दुर्लभ मियाजाकी आम सहित कई विदेशी और भारतीय किस्मों के आम अर्पित किए। इस अनूठी भेंट ने मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं का भी ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
महाकाल को समर्पित की पहली फसल
जबलपुर निवासी रानी सिंह परिहार ने बाबा महाकाल का विशेष पूजन-अर्चन करने के बाद मियाजाकी, जापानी, ऑस्ट्रेलियन, मल्लिका, चौसा और आम्रपाली जैसी कई प्रीमियम किस्मों के आम अर्पित किए। उन्होंने बताया कि उनके फार्म हाउस का नाम ‘श्री महाकालेश्वर हाइब्रिड फार्म’ है, जहां करीब 51 किस्म के आम उगाए जाते हैं। उनका मानना है कि बाबा महाकाल की कृपा से ही उन्हें यह सफलता मिली है, इसलिए हर नई फसल की शुरुआत भगवान को अर्पित कर परिवार और खेती की खुशहाली की कामना की जाती है।
2014 से निभा रही हैं अटूट आस्था की यह परंपरा
रानी सिंह परिहार और उनका परिवार पिछले एक दशक से भी अधिक समय से इस परंपरा का पालन कर रहा है। वर्ष 2014 से हर साल उनके बगीचे में तैयार होने वाली पहली आम की फसल सबसे पहले बाबा महाकाल को समर्पित की जाती है। परिवार का विश्वास है कि इस परंपरा ने उनके जीवन और खेती दोनों में समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखी है। इसी श्रद्धा के साथ इस वर्ष भी वे विशेष पूजा के बाद अपनी पहली फसल लेकर महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे।
विदेशी कुत्ते और सीसीटीवी करते हैं आमों की सुरक्षा
दुर्लभ और महंगे आमों की खेती होने के कारण इनकी सुरक्षा भी बेहद खास तरीके से की जाती है। फार्म हाउस में हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जबकि रात के समय विदेशी नस्ल के 18 प्रशिक्षित कुत्तों को पूरे बगीचे में छोड़ा जाता है। यही कुत्ते लाखों रुपये कीमत वाले इन दुर्लभ आमों की रखवाली करते हैं, जिससे फसल पूरी तरह सुरक्षित रह सके।
इतना महंगा क्यों है मियाजाकी आम?
मियाजाकी आम जापान के मियाजाकी प्रांत की विशेष किस्म है, जिसे ‘ताईयो नो टोमागो’ के नाम से भी जाना जाता है। इसका गहरा लाल रंग, बेहतरीन मिठास और औषधीय गुण इसे दुनिया के सबसे महंगे आमों में शामिल करते हैं। सामान्य रूप से इसका वजन 350 ग्राम के आसपास होता है, जबकि पूरी तरह पकने पर यह लगभग 900 ग्राम तक पहुंच सकता है। इसमें सामान्य आमों की तुलना में अधिक प्राकृतिक शुगर के साथ बीटा कैरोटीन, एंटीऑक्सीडेंट और फोलिक एसिड जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जिनकी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लाखों रुपये तक पहुंच जाती है।