पूरे मानसून सत्र से निलंबित हुए कल्याण बनर्जी, विवादित टिप्पणी पर लोकसभा की बड़ी कार्रवाई
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ लोकसभा में बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। विवादित टिप्पणियों के मामले में उन्हें मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया है। इस फैसले के बाद अब वे सत्र के बाकी दिनों में सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। सूत्रों के अनुसार, महिला सांसदों के लिए कथित तौर पर अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल को इस कार्रवाई की मुख्य वजह माना गया है।
सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप
लोकसभा के पीठासीन अधिकारी कृष्ण प्रसाद तेनेटी ने निलंबन की घोषणा करते हुए कहा कि कल्याण बनर्जी की टिप्पणियों ने सदन की गरिमा और संसदीय मर्यादा को प्रभावित किया है। बताया गया कि उनकी ओर से काकोली घोष और सायोनी घोष के लिए कथित रूप से अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया था, जिसके बाद यह सख्त फैसला लिया गया। इस कार्रवाई को संसद में अनुशासन बनाए रखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
संसद परिसर में हुई तीखी बहस
इस घटना से पहले विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद संसद परिसर में कल्याण बनर्जी की अपनी पार्टी छोड़ चुके कुछ पूर्व सहयोगियों और NCPI सांसदों के साथ तीखी बहस हुई थी। इस दौरान शताब्दी रॉय, मिताली बाग और काकोली घोष दस्तीदार समेत कई सांसद मौजूद थे। हालांकि, विवाद किस मुद्दे पर शुरू हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
बीच-बचाव के बाद भी नहीं थमा विवाद
बहस बढ़ने पर विपक्ष के कुछ सांसदों ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शांत कराने की कोशिश की। इसके बावजूद माहौल तनावपूर्ण बना रहा। बाद में जब कुछ सांसदों ने कल्याण बनर्जी से पूरे घटनाक्रम के बारे में बात करनी चाही, तब वे बिना कोई प्रतिक्रिया दिए लोकसभा से चले गए। इससे विवाद और अधिक चर्चा का विषय बन गया।
स्पीकर से की गई शिकायत
घटना के बाद NCPI के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलने उनके चैंबर पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल में मिताली बाग और काकोली घोष सहित अन्य सांसद भी शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक, स्पीकर ने पूरे मामले पर लिखित शिकायत देने को कहा है ताकि तथ्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
बंगाल की सियासत से जुड़ा है विवाद
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि पश्चिम बंगाल की राजनीति से भी जुड़ी मानी जा रही है। विधानसभा चुनाव में TMC की हार के बाद पार्टी के 20 सांसदों ने नेतृत्व के खिलाफ बगावत करते हुए NCPI का दामन थाम लिया था। इसके बाद से ये सांसद लोकसभा में भी TMC से अलग बैठ रहे हैं। ऐसे में संसद के भीतर दोनों पक्षों के बीच बढ़ती राजनीतिक तल्खी अब खुले टकराव के रूप में सामने आती दिख रही है।