भारत के लिए खुशखबरी! Oil India को समुद्र के नीचे मिला प्राकृतिक गैस का खजाना, कितना होगा फायदा?
भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए घरेलू स्तर पर प्राकृतिक गैस का उत्पादन बढ़ाना अहम है। इसी दिशा में सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) की ओर से एक नई खोज की जानकारी सामने आई है। कंपनी को कृष्णा-गोदावरी बेसिन के समुद्र में स्थित एक ब्लॉक में प्राकृतिक गैस मिली है। शुरुआती जांच में गैस का प्रवाह प्रतिदिन 2 लाख स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर तक पहुंचने की जानकारी दी गई है। ऐसे में इस खोज से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद है। आइए जानते हैं कि गैस का यह भंडार कहां मिला, जांच में क्या सामने आया और इससे देश को क्या फायदा हो सकता है।
कृष्णा-गोदावरी बेसिन में कहां मिली प्राकृतिक गैस?
ऑयल इंडिया लिमिटेड को कृष्णा-गोदावरी बेसिन के मत्स्यपुरी फॉर्मेशन में प्राकृतिक गैस मिली है। यह खोज KG-DSF/GSKW/2028 ब्लॉक के गोदावरी-1 कुएं में हुई है। समुद्र के उथले पानी में स्थित इस ब्लॉक को कंपनी ने डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड (DSF) की बोली प्रक्रिया के जरिए हासिल किया था। इस खोज को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि संबंधित क्षेत्र में पहले जांच नहीं की गई थी। शुरुआती परीक्षण में गैस मिलने के बाद अब कंपनी इस क्षेत्र के अन्य हिस्सों में भी इसकी मौजूदगी और उत्पादन की संभावनाओं का आकलन करने की तैयारी में है।
जांच के दौरान कितनी गैस मिली?
कंपनी ने 16 अक्टूबर 2026 को गोदावरी-1 कुएं में करीब 2,027 मीटर की गहराई पर गैस का परीक्षण शुरू किया था। शुरुआती जांच में यहां प्रतिदिन लगभग 1 लाख स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (SCMD) गैस का प्रवाह दर्ज किया गया। इसके बाद आगे के परीक्षण में यह मात्रा बढ़कर करीब 2 लाख SCMD तक पहुंच गई।
इसके अलावा, कंपनी ने प्रतिदिन लगभग 170 बैरल कंडेनसेट मिलने की जानकारी भी दी है। कंडेनसेट एक तरल हाइड्रोकार्बन है, जो प्राकृतिक गैस के साथ प्राप्त हो सकता है। अब कंपनी इस क्षेत्र के अगले ऊपरी हिस्से में भी गैस की मौजूदगी की जांच करने की तैयारी कर रही है। हालांकि, शुरुआती परीक्षण में गैस का प्रवाह मिलने से पूरे भंडार के आकार या व्यावसायिक उत्पादन की क्षमता का पता नहीं चलता। इसके लिए आगे विस्तृत जांच और मूल्यांकन जरूरी होगा।
भारत को इस खोज से क्या फायदा हो सकता है?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विदेशों से बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस और कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में देश के भीतर नए गैस भंडार मिलने से घरेलू उत्पादन बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं। यदि इस क्षेत्र से व्यावसायिक स्तर पर गैस का उत्पादन शुरू होता है, तो इससे आयात पर निर्भरता घटाने और विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिल सकती है।
घरेलू गैस की उपलब्धता बढ़ने का फायदा कई उद्योगों को मिल सकता है। खाद बनाने वाली कंपनियां, बिजली उत्पादन केंद्र और रिफाइनरी उद्योग प्राकृतिक गैस के प्रमुख उपभोक्ता हैं। इसके अलावा, शहरों में वाहनों के लिए सीएनजी और घरों में खाना पकाने के लिए पीएनजी की आपूर्ति को भी फायदा हो सकता है। हालांकि, इस खोज का वास्तविक आर्थिक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि क्षेत्र में कुल कितना गैस भंडार मौजूद है, उत्पादन कितने समय तक जारी रह सकता है और गैस को बाजार तक पहुंचाने में कितनी लागत आती है।
भारत कितनी प्राकृतिक गैस और कच्चा तेल आयात करता है?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। दी गई जानकारी के मुताबिक, देश अपनी जरूरत की लगभग 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और करीब 88 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात करता है। इस वजह से घरेलू स्तर पर तेल और गैस की नई खोजें ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो जाती हैं।
यदि कृष्णा-गोदावरी बेसिन में मिली गैस का व्यावसायिक उत्पादन संभव होता है, तो इससे घरेलू आपूर्ति में योगदान मिल सकता है। हालांकि, आयात पर निर्भरता कितनी कम होगी, यह उत्पादन की वास्तविक मात्रा और देश की कुल मांग पर निर्भर करेगा।
प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल कहां-कहां होता है?
प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल देश में कई जरूरी क्षेत्रों में किया जाता है। बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण और रिफाइनरी उद्योग इसके बड़े उपयोगकर्ताओं में शामिल हैं। इसके अलावा, वाहनों में ईंधन के रूप में सीएनजी और घरों में खाना पकाने के लिए पीएनजी के तौर पर भी प्राकृतिक गैस का उपयोग किया जाता है।
यही वजह है कि नए गैस भंडारों की खोज को भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए अहम माना जाता है। ऑयल इंडिया लिमिटेड की कृष्णा-गोदावरी बेसिन में हुई यह खोज भी घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक संभावित अवसर है। अब आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि यहां से कितनी गैस का व्यावसायिक उत्पादन किया जा सकता है और देश की ऊर्जा आपूर्ति में इसका कितना योगदान रहेगा।