चांदी की चमक पड़ी फीकी, 11 महीने के निचले स्तर पर पहुंची; सोने में भी बड़ी गिरावट, जानें ताजा रेट
त्योहारी सीजन में सोने-चांदी की खरीदारी का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय सर्राफा बाजार में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। चांदी एक ही दिन में 8,300 रुपये सस्ती हो गई, जबकि सोने के भाव में भी 1,300 रुपये की कमी आई। इस गिरावट के साथ चांदी करीब 11 महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी बिकवाली को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।
चांदी की कीमत में 8,300 रुपये की बड़ी गिरावट
दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत 8,300 रुपये गिरकर 1,90,200 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। इससे पहले गुरुवार को इसका भाव 1,98,500 रुपये प्रति किलोग्राम था। लगातार उतार-चढ़ाव के बीच आई इस बड़ी गिरावट ने बाजार का ध्यान खींचा है। चांदी इससे पहले 10 दिसंबर 2025 को इसी तरह के निचले स्तर पर कारोबार करती दिखाई दी थी। ऐसे में मौजूदा गिरावट को बीते करीब 11 महीनों का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है।
सोना भी 1,300 रुपये हुआ सस्ता
चांदी के साथ सोने की कीमतों में भी नरमी देखने को मिली। ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के मुताबिक, 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना 1,300 रुपये टूटकर 1,45,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। गुरुवार को इसका भाव 1,46,500 रुपये प्रति 10 ग्राम था। यानी एक दिन में सोने की कीमत में भी अच्छी-खासी कमी दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कमजोर स्थिति का असर घरेलू सर्राफा बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।
विदेशी बाजार में भी सोने-चांदी की चमक पड़ी फीकी
वैश्विक बाजार में भी दोनों धातुओं पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है। शुक्रवार को हाजिर सोना 53.15 डॉलर यानी 1.32 फीसदी गिरकर 3,968.24 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। इस तरह सोना 4,000 डॉलर के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। वहीं, चांदी की कीमत में करीब 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और इसका भाव 50.12 डॉलर प्रति औंस रह गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका में मजबूत आर्थिक आंकड़ों, महंगाई की चिंता और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका ने निवेशकों का रुख प्रभावित किया है।
आगे कैसी रह सकती हैं कीमतें?
बाजार में जारी अनिश्चितता के बीच सोने-चांदी की कीमतों में फिलहाल दबाव देखने को मिल रहा है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर संभावित सख्ती और शेयर बाजार में बिकवाली जैसे कारण निवेशकों को कीमती धातुओं से दूरी बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसके अलावा, तकनीकी कंपनियों के शेयरों में गिरावट के चलते कुछ निवेशक अन्य परिसंपत्तियों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी सोने-चांदी से पैसा निकाल रहे हैं। हालांकि, आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगी।