रवनीत सिंह बिट्टू का मोदी कैबिनेट से इस्तीफा, राष्ट्रपति ने तत्काल किया स्वीकार, जानिए वजह
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा राजनीतिक संकेत दिया है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसे राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। लंबे समय से उनके पंजाब की सक्रिय राजनीति में लौटने की अटकलें लगाई जा रही थीं और अब उनके इस्तीफे ने इन चर्चाओं को और तेज कर दिया है। माना जा रहा है कि भाजपा उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है या फिर किसी अहम सीट से मैदान में उतार सकती है।
इस्तीफे के पीछे पंजाब चुनाव की रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा पंजाब चुनाव को लेकर अपनी रणनीति में बदलाव कर रही है और रवनीत सिंह बिट्टू को राज्य की राजनीति में अहम भूमिका देने की तैयारी है। बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल जून में समाप्त हो चुका था और उन्हें दोबारा सदन नहीं भेजा गया। इसके बाद से ही यह चर्चा थी कि पार्टी उन्हें केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी से मुक्त कर पंजाब में संगठन और चुनावी अभियान की कमान सौंप सकती है। उनके इस्तीफे ने इन अटकलों को लगभग पुख्ता कर दिया है।
सिख चेहरे के तौर पर भाजपा की बड़ी उम्मीद
रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब के प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके दादा बेअंत सिंह राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं। भाजपा उन्हें पंजाब में अपने प्रमुख सिख चेहरे के रूप में देखती है। पिछले कुछ वर्षों में पार्टी ने सुनील जाखड़, कैप्टन अमरिंदर सिंह, केवल सिंह ढिल्लो और रवनीत सिंह बिट्टू जैसे नेताओं को आगे बढ़ाकर राज्य में अपना आधार मजबूत करने की कोशिश की है। पार्टी का मानना है कि बिट्टू की सक्रिय भूमिका से उसे ग्रामीण और सिख मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
चुनावी समीकरण बदलने की तैयारी में भाजपा
अगले साल मार्च-अप्रैल में पंजाब समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। पंजाब में फिलहाल आम आदमी पार्टी की सरकार है, जबकि कांग्रेस आंतरिक कलह से जूझ रही है। ऐसे राजनीतिक माहौल में भाजपा इसे अपने विस्तार का अवसर मान रही है और संकेत हैं कि वह राज्य में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। अब तक शहरी हिंदू मतदाताओं की पार्टी मानी जाने वाली भाजपा सिख समुदाय और नए सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा इसी व्यापक चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।