आर्थिक तंगी झेली, 13 साल की उम्र में वेटलिफ्टिंग… कौन हैं मीराबाई चानू? जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स जीता गोल्ड मेडल
भारतीय वेटलिफ्टिंग की सबसे भरोसेमंद स्टार साइखोम मीराबाई चानू ने एक बार फिर दुनिया के मंच पर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीत लिया। इस जीत के साथ मीराबाई ने लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड अपने नाम कर इतिहास रच दिया। गोल्ड कोस्ट 2018 और बर्मिंघम 2022 के बाद अब ग्लासगो 2026 में भी उनका दबदबा कायम रहा।
रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन से पक्का किया गोल्ड
मीराबाई चानू ने कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर प्रतियोगिता में शीर्ष स्थान हासिल किया। स्नैच राउंड में उन्होंने 85 किलोग्राम वजन उठाते हुए नया कॉमनवेल्थ गेम्स और चैंपियनशिप रिकॉर्ड अपने नाम किया। हालांकि उनकी पहली कोशिश 82 किलोग्राम पर असफल रही, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए दूसरी कोशिश में 82 किलोग्राम और अंतिम प्रयास में 85 किलोग्राम उठाकर रिकॉर्ड बना दिया। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम वजन उठाकर उन्होंने स्वर्ण पदक पर अपनी मुहर लगा दी।
लगातार तीसरे कॉमनवेल्थ गोल्ड से बढ़ाया भारत का गौरव
कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में लगातार तीन स्वर्ण पदक जीतना मीराबाई चानू की असाधारण निरंतरता और मेहनत का प्रमाण है। भारतीय वेटलिफ्टिंग में उनका नाम पहले ही दिग्गज खिलाड़ियों में शामिल है और अब इस नई उपलब्धि ने उनके करियर को और भी खास बना दिया है। ग्लासगो में भारत का पहला गोल्ड जीतकर उन्होंने पूरे देश को जश्न मनाने का मौका दिया और यह साबित कर दिया कि बड़े मंच पर उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद हमेशा की जा सकती है।
कौन हैं मीराबाई चानू?
मणिपुर के इंफाल की रहने वाली साइखोम मीराबाई चानू का सफर संघर्ष, अनुशासन और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। महज 13 साल की उम्र में वेटलिफ्टिंग शुरू करने वाली मीराबाई ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपने सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। शुरुआती दिनों में संसाधनों और सही डाइट की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करने के बाद भी उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी। आज ओलंपिक पदक विजेता और कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीन बार स्वर्ण पदक जीतने वाली मीराबाई चानू करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।