गाजियाबाद: ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा ‘जूठन’ पर विचार संगोष्ठी, शिक्षित वाल्मीकि परिवार ने किया आयोजन
गाजियाबाद के संजय नगर स्थित फ्रेंड्स कॉलोनी में रविवार को शिक्षित वाल्मीकि परिवार द्वारा महान लेखक ओमप्रकाश वाल्मीकि द्वारा लिखित चर्चित आत्मकथात्मक पुस्तक ‘जूठन’ (भाग-ए) पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया. इस चर्चा बैठक में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने भाग लिया. कार्यक्रम का उद्देश्य पुस्तक के माध्यम से समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव, सामाजिक असमानता और शिक्षा के महत्व पर संवाद स्थापित करना था.
बैठक के दौरान वक्ताओं ने कहा कि ‘जूठन’ केवल एक आत्मकथा नहीं, बल्कि भारतीय समाज की उस सच्चाई का दस्तावेज है, जिसमें दलित समाज के संघर्ष, अपमान, सामाजिक बहिष्कार और सम्मान की लड़ाई को बेहद संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है. उन्होंने बताया कि ओमप्रकाश वाल्मीकि ने अपने जीवन के अनुभवों को पुस्तक में जिस ईमानदारी और साहस के साथ लिखा है, वह पाठकों को समाज की वास्तविकताओं से रूबरू कराता है.
वक्ताओं ने पुस्तक के विभिन्न अध्यायों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि ‘जूठन’ सामाजिक न्याय, समान अवसर और मानवीय गरिमा के महत्व को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कृति है. उन्होंने युवाओं से ऐसी पुस्तकों का अध्ययन करने का आह्वान किया, ताकि समाज में संवेदनशीलता, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती मिल सके.
गोष्ठी में मौजूद प्रतिभागियों ने भी पुस्तक से जुड़े अपने विचार साझा किए. कई वक्ताओं ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और ‘जूठन’ जैसी रचनाएं केवल इतिहास को दर्ज नहीं करतीं, बल्कि समाज को आत्ममंथन करने और सकारात्मक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देती हैं.
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने नियमित रूप से ऐसी साहित्यिक चर्चा बैठकों के आयोजन की बात कही. इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से जितेंद्र पार्चा, आर पी सिंह, अनुराधा धींगान, मनीषा सूद, संजीव सूद, सनी कुमार, सुनील पार्चा, सोनिया सूद, निधि धींगान, धर्मेंद्र पार्चा, कुणाल धींगान, अंकित कुमार, अश्विनी वैद्य और दिव्यांश सूद उपस्थित रहे.
संपादन: युवराज सिंह