कौन हैं वेटलिफ्टर बिंदियारानी देवी? जिन्होंने CWG 2026 में भारत को दिलाया ब्रॉन्ज मेडल
हर पदक के पीछे सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि संघर्ष, त्याग और अटूट हौसले की एक लंबी कहानी होती है। भारतीय वेटलिफ्टर बिंदियारानी देवी की सफलता भी कुछ ऐसी ही है। कभी आर्थिक तंगी के कारण प्रोफेशनल लिफ्टिंग शूज तक खरीदने में असमर्थ रहीं बिंदियारानी ने आज अपनी मेहनत के दम पर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए कांस्य पदक जीतकर करोड़ों देशवासियों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। यह लगातार दूसरा कॉमनवेल्थ मेडल है, जिसने उन्हें भारतीय वेटलिफ्टिंग की नई प्रेरणा बना दिया है।
ग्लासगो में दिलाया भारत को छठा पदक
ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की महिला 58 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा में बिंदियारानी देवी ने कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक अपने नाम किया। स्नैच राउंड में उन्होंने 83, 85 और 87 किलोग्राम के तीनों प्रयास सफलतापूर्वक पूरे किए। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में पहला प्रयास 110 किलोग्राम पर असफल रहा, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए दूसरे प्रयास में 112 किलोग्राम वजन उठाया और पदक पर कब्जा जमा लिया। इस स्पर्धा में नाइजीरिया की रफियातु लवाल ने 229 किलोग्राम के नए गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक, जबकि कनाडा की खिलाड़ी ने रजत पदक जीता।
मणिपुर से निकली नई स्टार, जिसने दुनिया में बनाई पहचान
1999 में जन्मीं बिंदियारानी देवी मणिपुर की उसी खेल अकादमी से निकली हैं, जहां से ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू ने भी अपने करियर की शुरुआत की थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें पहली बड़ी सफलता 2021 की विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप में मिली, जब उन्होंने 55 किलोग्राम क्लीन एंड जर्क स्पर्धा में टोक्यो ओलंपिक चैंपियन को पछाड़कर स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद उन्होंने लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार किया और अब कॉमनवेल्थ खेलों में लगातार दूसरा पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का एक और प्रमाण दिया है।
जब मीराबाई चानू ने बढ़ाया मदद का हाथ
बिंदियारानी देवी हमेशा से मीराबाई चानू को अपना आदर्श मानती रही हैं। शुरुआती प्रशिक्षण के दौरान जब वह नई थीं, तब मीराबाई ने उन्हें न सिर्फ खेल की बारीकियां सिखाईं, बल्कि हर कदम पर उनका हौसला भी बढ़ाया। एक समय ऐसा भी आया जब आर्थिक तंगी के कारण बिंदियारानी के पास प्रोफेशनल वेटलिफ्टिंग शूज खरीदने के पैसे नहीं थे। यह बात जब मीराबाई को पता चली तो उन्होंने खुद उनके लिए नए लिफ्टिंग शूज खरीदकर उपहार में दिए। यह छोटा-सा सहयोग बिंदियारानी के लिए बड़ी प्रेरणा बन गया।
सफर बना लाखों युवाओं के लिए मिसाल
बिंदियारानी देवी की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सीमित संसाधन कभी भी बड़े सपनों की राह नहीं रोक सकते। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया और लगातार मेहनत करते हुए देश के लिए पदक जीतने का सपना पूरा किया। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का यह कांस्य पदक केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, जो चुनौतियों के बावजूद अपने जुनून और मेहनत के दम पर दुनिया में भारत का नाम रोशन करने का सपना देखते हैं।