हंगामे के बीच लोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन बिल पास, सत्ता-विपक्ष में हुई तीखी बहस
संसद के मानसून सत्र में बुधवार को जोरदार हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक संशोधन बिल लोकसभा से पारित हो गया। लंबी चर्चा और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस के बाद बिल को ध्वनि मत से मंजूरी दे दी गई। इससे पहले विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ, जिसके चलते कई बार माहौल गर्म हो गया। बिल पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के सांसदों के बीच पेपर लीक की घटनाओं, परीक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य को लेकर आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बिल पारित होने की घोषणा की और इसके बाद सदन की कार्यवाही 30 जुलाई की सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बिल पेश करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण बिल पर चर्चा करने और सुझाव देने के बजाए विपक्ष राजनीति कर रहा है. जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘विपक्ष का आचरण बेहद निराशाजनक है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता को दर्शाने वाले इतने गंभीर और महत्वपूर्ण विधेयक पर रचनात्मक सुझाव देने के बजाय विपक्ष राजनीति कर रहा है. विपक्ष के नेता ने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, वह न केवल असंसदीय थी, बल्कि इतनी अनुचित थी कि मैं उसे दोहराना भी नहीं चाहूंगा. यदि कोई खुद को शिक्षित और संसदीय परंपराओं से परिचित मानता है, तो उसे पता होना चाहिए कि सदन के भीतर ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं किया जा सकता.’
उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष के नेता द्वारा देश के युवाओं को मूर्ख कहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा, ‘इस देश के युवाओं को, जो देश का भविष्य हैं, ‘मूर्ख’ कहना इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है. मुझे आश्चर्य होता है कि क्या उन्हें संसदीय कार्यवाही के बुनियादी नियमों और मर्यादाओं की भी जानकारी है.’ केंद्रीय मंत्री ने 21 जुलाई की घटना का जिक्र करते हुए विपक्ष के नेता पर तंज कसा.’
उन्होंने कहा, ’21 जुलाई को विपक्ष के नेता शायद किसी विशेष सोच के कारण प्रधानमंत्री के आवास 7 एलकेएम के बाहर जाकर बैठ गए. ऐसा लगा मानो उनकी गहरी इच्छा थी कि देश उन्हें चुने और 7 एलकेएम में बैठाए. जब यह इच्छा पूरी नहीं हुई तो वे निराश और हताश होकर वहां के गेट पर जाकर बैठ गए. जब उन्हें विनम्रता से समझाया गया कि ऐसा व्यवहार उनके पद और कद के अनुरूप नहीं है, तो उन्होंने कहा कि उन्हें बस वहां से हटा दिया जाए.’
सदन में उठाए गए एक अन्य मुद्दे पर जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि जिस घटना का जिक्र किया जा रहा है, उसमें गोली नहीं चलाई गई थी, बल्कि केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था. उन्होंने कहा, ‘बार-बार स्पष्ट किया गया है कि कोई गोली नहीं चली. जब गोली चली ही नहीं, तो गोली चलाने के आदेश का सवाल ही नहीं उठता. इस तरह का आदेश देने का अधिकार मंत्री के पास नहीं, बल्कि मजिस्ट्रेट के पास होता है.’