Ajinkya Rahane Retirement: अजिंक्य रहाणे ने किक्रेट से लिया संन्यास, ये 5 धमाकेदार पारियां हमेशा रहेंगी याद
भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद टेस्ट बल्लेबाजों में गिने जाने वाले अजिंक्य रहाणे ने इंटरनेशनल क्रिकेट और सभी फॉर्मेट से संन्यास लेकर एक यादगार अध्याय का अंत कर दिया। शांत स्वभाव, मजबूत तकनीक और मुश्किल परिस्थितियों में टीम को संभालने की कला ने उन्हें विदेशी दौरों पर भारत का सबसे विश्वसनीय बल्लेबाज बना दिया। उनके संन्यास के साथ उन पारियों की यादें भी ताजा हो गईं, जिन्होंने दुनिया के सबसे कठिन मैदानों पर भारतीय क्रिकेट का सिर गर्व से ऊंचा किया।
डरबन में 96 रन से दुनिया को दिया पहला संदेश
साल 2013 में दक्षिण अफ्रीका के डरबन टेस्ट में अजिंक्य रहाणे ने अपने करियर की शुरुआती टेस्ट पारियों में ही बता दिया था कि विदेशी पिचों पर उनका खेल अलग स्तर का है। डेल स्टेन, वर्नोन फिलेंडर और मोर्ने मोर्केल जैसे घातक गेंदबाजों के सामने भारतीय बल्लेबाजी लड़खड़ा गई थी, लेकिन रहाणे ने 96 रन की जुझारू पारी खेलकर टीम को सम्मानजनक स्थिति तक पहुंचाया। भले ही वह शतक से चूक गए, लेकिन इस पारी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव रख दी।
वेलिंगटन और मेलबर्न में दिखाई क्लास और आत्मविश्वास
न्यूजीलैंड के खिलाफ 2014 में वेलिंगटन टेस्ट के दौरान रहाणे ने सातवें नंबर पर उतरकर 118 रन बनाए और भारत को लगभग तय हार से बचा लिया। इसके कुछ ही महीनों बाद मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने 147 रन की शानदार पारी खेली। मिचेल जॉनसन और रयान हैरिस जैसे तेज गेंदबाजों के सामने उनका धैर्य और तकनीक देखने लायक थी। विराट कोहली के साथ उनकी साझेदारी ने भारत को मुकाबले में बनाए रखा और इस पारी ने उन्हें विदेशी पिचों का विशेषज्ञ बल्लेबाज साबित कर दिया।
लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर दर्ज हुआ नाम
इंग्लैंड दौरे के दौरान 2014 में लॉर्ड्स टेस्ट में जब भारतीय टीम मुश्किल में थी, तब रहाणे ने दबाव के बीच 103 रन की संयमित पारी खेली। हरी पिच और स्विंग गेंदबाजी के बीच उनका शतक भारत की ऐतिहासिक जीत की सबसे मजबूत नींव बना। इसी जीत के साथ भारत ने 28 साल बाद लॉर्ड्स में टेस्ट मुकाबला अपने नाम किया और रहाणे का नाम प्रतिष्ठित ऑनर्स बोर्ड पर हमेशा के लिए दर्ज हो गया।
मेलबर्न 2020 की कप्तानी वाली पारी बनी करियर की पहचान
2020-21 के ऑस्ट्रेलिया दौरे की मेलबर्न टेस्ट पारी को अजिंक्य रहाणे के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। एडिलेड में 36 रन पर ऑलआउट होने की निराशा और विराट कोहली की गैरमौजूदगी के बीच कार्यवाहक कप्तान के रूप में उन्होंने 112 रन की कप्तानी पारी खेली। रवींद्र जडेजा के साथ उनकी साझेदारी ने मैच का रुख बदल दिया, भारत ने बॉक्सिंग डे टेस्ट जीता और फिर गाबा में इतिहास रचते हुए 2-1 से टेस्ट सीरीज अपने नाम कर ली।
मुश्किल वक्त में उम्मीद का दूसरा नाम थे रहाणे
अजिंक्य रहाणे का करियर सिर्फ आंकड़ों से नहीं, बल्कि उन हालात से याद किया जाएगा जब उन्होंने टीम इंडिया को संकट से बाहर निकाला। विदेशी पिचों पर उनका धैर्य, अनुशासन और जिम्मेदारी लेने का जज्बा उन्हें भारतीय टेस्ट क्रिकेट के सबसे खास बल्लेबाजों में शामिल करता है। संन्यास के बाद भी उनकी ये पारियां भारतीय क्रिकेट इतिहास में साहस, नेतृत्व और भरोसे की मिसाल बनकर हमेशा याद की जाएंगी।