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भारत

92 साल का सूखा खत्म! अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जूडो में भारत को दिलाया पहला गोल्ड

By yuvraj singh
July 31, 2026 2 Min Read
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारतीय जूडो के लिए एक ऐसे मोड़ के रूप में याद किए जाएंगे, जिसने दशकों का इंतजार खत्म कर दिया। भारत की अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने अपने शानदार प्रदर्शन से न केवल स्वर्ण पदक जीते, बल्कि उस रिकॉर्ड को भी बदल दिया जो पिछले 92 वर्षों से भारतीय जूडो के साथ जुड़ा हुआ था। पहली बार किसी भारतीय महिला और पुरुष जूडो खिलाड़ी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर देश को इस खेल में नई पहचान दिलाई। इन दोनों जीतों ने यह साबित कर दिया कि भारतीय जूडो अब विश्व स्तर पर नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है।

अस्मिता डे ने दिलाया पहला ऐतिहासिक गोल्ड

महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में अस्मिता डे का मुकाबला कनाडा की हाइडी क्वाच से हुआ। दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला इतना कड़ा रहा कि निर्धारित समय तक कोई बढ़त नहीं बना सका। इसके बाद विजेता का फैसला एक्स्ट्रा टाइम में हुआ, जहां ‘गोल्डन स्कोर’ नियम लागू था। अस्मिता ने दबाव के इस क्षण में शानदार दांव लगाते हुए पहला स्कोर किया और मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाली एथलीट बन गईं। 1934 में पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने के बाद से भारत जिस उपलब्धि का इंतजार कर रहा था, उसे अस्मिता ने आखिरकार पूरा कर दिया।

हर्ष सिंह ने 10-0 से जीतकर बनाया नया कीर्तिमान

पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज के खिलाफ पूरी तरह एकतरफा प्रदर्शन किया। उन्होंने मुकाबले में शुरुआत से ही आक्रामक रणनीति अपनाई और प्रतिद्वंद्वी को कोई मौका नहीं देते हुए 10-0 के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। इस जीत के साथ हर्ष सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले पुरुष खिलाड़ी बन गए। उनका आत्मविश्वास, तकनीकी कौशल और दबदबा पूरे मुकाबले में साफ नजर आया, जिसने भारतीय दल के लिए यह जीत और भी खास बना दी।

पदक तालिका में भारत की मजबूत छलांग

अस्मिता डे और हर्ष सिंह की ऐतिहासिक सफलताओं के बाद भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। भारतीय दल अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की पदक तालिका में आठवें स्थान पर पहुंच गया है। फिलहाल भारत के खाते में 5 गोल्ड, 10 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज मेडल दर्ज हैं। जूडो में भारत की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है, क्योंकि महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में यामिनी मौर्य भी स्वर्ण पदक की दावेदार हैं। उनका मुकाबला इंग्लैंड की एसिला टोपराक से होना है और देश को उम्मीद है कि भारतीय जूडो का यह स्वर्णिम सफर आगे भी जारी रहेगा।

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Commonwealth GamesSports News
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yuvraj singh

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