कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की बेटियों का जलवा! बॉक्सिंग में 5 गोल्ड मेडल जीतकर रचा नया इतिहास
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिला मुक्केबाजों ने ऐसा प्रदर्शन किया जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। एक के बाद एक फाइनल मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने जिस आत्मविश्वास, तकनीक और आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया, उसने भारत के पदकों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी कर दी। जैस्मिन लैम्बोरिया, प्रीति पवार, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस और अरुंधति चौधरी ने अपने-अपने वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय बॉक्सिंग की नई ताकत का परिचय दिया। वहीं पुरुष वर्ग में जदुमणि सिंह ने शानदार संघर्ष के बाद रजत पदक हासिल कर भारत की उपलब्धियों में एक और पदक जोड़ा।
भारतीय बॉक्सिंग को नई ऊंचाई पर पहुंचाया
भारतीय महिला मुक्केबाजों का दबदबा पूरे दिन देखने को मिला। 54 किलोग्राम वर्ग में प्रीति पवार ने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को हराकर स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद विश्व चैंपियन जैस्मिन लैम्बोरिया ने 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में उत्तरी आयरलैंड की माइकेला वॉल्श को मात देकर भारत की झोली में एक और गोल्ड डाला। 51 किलोग्राम वर्ग में साक्षी चौधरी ने इंग्लैंड की रूबी व्हाइट को हराकर जीत का सिलसिला जारी रखा। वहीं 60 किलोग्राम वर्ग में प्रिया घनघस ने कनाडा की मैरी अल-अहमदीह को हराया और 70 किलोग्राम वर्ग में अरुंधति चौधरी ने इंग्लैंड की चैंटेल रीड को पराजित कर भारत के लिए पांचवां स्वर्ण पदक सुनिश्चित किया।
अरुंधति ने फाइनल में दिखाया पूरी तरह एकतरफा दबदबा
महिलाओं के 70 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में अरुंधति चौधरी ने शुरुआत से ही मुकाबले पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। इंग्लैंड की चैंटेल रीड उनके सामने पूरे मुकाबले में प्रभाव नहीं छोड़ सकीं। अरुंधति ने तेज पंच, बेहतरीन फुटवर्क और शानदार रणनीति के दम पर निर्णायकों को पूरी तरह प्रभावित किया। अंत में सभी पांचों जजों ने 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से उन्हें विजेता घोषित किया। इस जीत के साथ उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के अभियान को और मजबूत बना दिया।
साक्षी और प्रिया ने दिखाई चैंपियन वाली मानसिकता
साक्षी चौधरी ने महिलाओं के 51 किलोग्राम वर्ग में इंग्लैंड की रूबी व्हाइट के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने पूरे मुकाबले में आक्रामक अंदाज बनाए रखा और विरोधी खिलाड़ी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। दूसरी ओर, प्रिया घनघस का मुकाबला बेहद चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन उन्होंने धैर्य और तकनीकी कौशल के दम पर कनाडा की मैरी अल-अहमदीह को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। दोनों खिलाड़ियों की जीत ने यह साबित कर दिया कि भारतीय महिला मुक्केबाजी अब विश्व स्तर पर लगातार मजबूत होती जा रही है।
जैस्मिन और प्रीति ने भी कायम रखा जीत का सिलसिला
भारतीय टीम की शुरुआत भी बेहद दमदार रही। प्रीति पवार ने 54 किलोग्राम वर्ग में अपने शानदार खेल से कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को हराया। इसके बाद मौजूदा विश्व चैंपियन जैस्मिन लैम्बोरिया ने अपने अनुभव और सटीक रणनीति का शानदार प्रदर्शन करते हुए माइकेला वॉल्श को मात दी। इन दोनों जीतों ने भारतीय टीम का मनोबल बढ़ाया और आगे आने वाले फाइनल मुकाबलों में बाकी खिलाड़ियों के लिए भी आत्मविश्वास की मजबूत नींव तैयार कर दी।
जदुमणि सिंह ने रजत जीतकर बढ़ाया भारत का सम्मान
पुरुषों के फाइनल मुकाबले में भारत के जदुमणि सिंह का सामना ऑस्ट्रेलिया के जे डिक्सन से हुआ। मुकाबला बेहद प्रतिस्पर्धी रहा और दोनों खिलाड़ियों ने शानदार मुक्केबाजी का प्रदर्शन किया। हालांकि अंतिम फैसला ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी के पक्ष में गया और जदुमणि को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। बावजूद इसके उनका प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में सराहनीय रहा और उन्होंने भारत के लिए महत्वपूर्ण पदक जीतकर टीम के अभियान को और मजबूत बनाया।
पदक तालिका में भारत की मजबूत स्थिति
भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन का असर पदक तालिका में भी साफ दिखाई दे रहा है। अब तक भारत कुल 33 पदक जीत चुका है, जिनमें 10 स्वर्ण, 15 रजत और 8 कांस्य पदक शामिल हैं। इस प्रदर्शन के साथ भारत पांचवें स्थान पर बना हुआ है और आने वाले मुकाबलों में पदकों की संख्या बढ़ने की पूरी उम्मीद है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 142 पदकों के साथ शीर्ष स्थान पर कायम है। भारतीय महिला मुक्केबाजों की यह ऐतिहासिक सफलता न केवल देश के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा बन गई है।