Manjalpur By-Election: मांजलपुर उपचुनाव में BJP की बड़ी जीत, 30 हजार से अधिक वोटों से जीते सतीश पटेल
गुजरात के वडोदरा जिले की मांजलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव का परिणाम सिर्फ बीजेपी की एक और जीत तक सीमित नहीं रहा। इस चुनाव ने कई ऐसे राजनीतिक संकेत दिए, जिन पर अब चर्चा तेज हो गई है। एक ओर बीजेपी ने भारी अंतर से सीट बरकरार रखकर अपने मजबूत जनाधार का प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस मुकाबले में कहीं टिकती नजर नहीं आई। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि NOTA ने भी हजारों वोट हासिल कर तीसरा स्थान हासिल कर लिया। ऐसे में यह चुनाव सिर्फ जीत-हार का नहीं, बल्कि मतदाताओं के बदलते रुझान और विपक्ष की कमजोर होती स्थिति का भी आईना बन गया।
बीजेपी ने फिर साबित किया मांजलपुर पर दबदबा
मांजलपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ मानी जाती है। दिवंगत विधायक योगेश पटेल के निधन के बाद हुए इस उपचुनाव में भी पार्टी ने अपनी पकड़ बरकरार रखी। बीजेपी उम्मीदवार सतेंद्रभाई (सतीश) पटेल ने कुल 55,481 वोट हासिल करते हुए शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार भीखाभाई रबारी को 30,630 वोटों के बड़े अंतर से हराया। यह नतीजा साफ संकेत देता है कि वडोदरा के इस शहरी क्षेत्र में बीजेपी का संगठन, कार्यकर्ता नेटवर्क और पारंपरिक वोट बैंक अब भी बेहद मजबूत बना हुआ है।
दूसरे स्थान पर रही कांग्रेस
चुनाव परिणामों में कांग्रेस उम्मीदवार भीखाभाई रबारी दूसरे स्थान पर जरूर रहे, लेकिन पूरी मतगणना के दौरान वह बीजेपी को चुनौती देते नजर नहीं आए। उन्हें कुल 24,851 वोट मिले, जो विजेता उम्मीदवार से काफी कम रहे। शुरुआती राउंड से लेकर अंतिम दौर तक बीजेपी लगातार बढ़त बनाती रही और कांग्रेस उस अंतर को कम करने में सफल नहीं हो सकी। यह नतीजा इस बात का संकेत माना जा रहा है कि शहरी गुजरात में कांग्रेस अभी भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की चुनौती से जूझ रही है।
तीसरे नंबर पर कैसे पहुंच गया NOTA?
इस उपचुनाव का सबसे चर्चित पहलू NOTA रहा। चुनाव आयोग के अंतिम आंकड़ों के अनुसार 2,247 मतदाताओं ने किसी भी उम्मीदवार को वोट देने के बजाय NOTA का विकल्प चुना। इसी वजह से NOTA तीसरे स्थान पर पहुंच गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उन मतदाताओं की नाराजगी का संकेत हो सकता है, जो चुनाव मैदान में मौजूद किसी भी उम्मीदवार को अपना समर्थन देने के इच्छुक नहीं थे। हालांकि NOTA का चुनाव परिणाम पर सीधा असर नहीं पड़ता, लेकिन इसका तीसरे स्थान पर पहुंचना राजनीतिक दलों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश जरूर माना जा रहा है।
AAP की गैरमौजूदगी भी बनी चर्चा का विषय
वर्ष 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने राज्यभर में आक्रामक प्रचार किया था और कई सीटों पर उल्लेखनीय वोट शेयर भी हासिल किया था। लेकिन मांजलपुर उपचुनाव में पार्टी ने उम्मीदवार नहीं उतारा। इसके कारण मुकाबला सीधे बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीमित हो गया। चुनावी मैदान से AAP की अनुपस्थिति ने इस सीट की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल दी और परिणामों में पार्टी का कोई प्रभाव दिखाई नहीं दिया।
कम मतदान ने भी परिणामों को किया प्रभावित
मांजलपुर उपचुनाव में मतदान लगभग 37 प्रतिशत के आसपास दर्ज किया गया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कम मतदान का फायदा बीजेपी को मिला क्योंकि उसका पारंपरिक समर्थक वर्ग बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों तक पहुंचा। दूसरी ओर विपक्ष अपने समर्थकों को उसी स्तर पर मतदान के लिए प्रेरित नहीं कर सका। इसका असर अंतिम वोट अंतर में भी साफ तौर पर दिखाई दिया, जिसने बीजेपी की जीत को और अधिक निर्णायक बना दिया।