Monsoon Session: आज से संसद का मानसून सत्र, कई अहम विधेयकों पर रहेगी नजर, विपक्ष के निशाने पर सरकार
देश की संसद का मानसून सत्र ऐसे समय में शुरू हो रहा है, जब राजनीतिक माहौल पहले से ही बेहद गर्म है। सत्ता पक्ष और विपक्ष कई संवेदनशील मुद्दों पर आमने-सामने खड़े हैं, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में संसद के दोनों सदनों में तीखी बहस और जोरदार टकराव देखने को मिल सकता है। सरकार जहां अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष जनहित और राजनीतिक रूप से अहम मुद्दों को उठाकर केंद्र सरकार को घेरने की रणनीति के साथ मैदान में उतरेगा। ऐसे में यह मानसून सत्र केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की राजनीति की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच भी बन सकता है।
सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने उठाए कई बड़े मुद्दे
सत्र शुरू होने से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने कई ऐसे विषयों को प्रमुखता से उठाया, जिन्हें लेकर हाल के दिनों में देशभर में चर्चा होती रही है। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी, विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले, एथनॉल नीति और अन्य जनहित से जुड़े विषयों पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की गई। दूसरी ओर सरकार ने सभी दलों से अपील की कि लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलने दिया जाए, ताकि महत्वपूर्ण विधायी कार्य बिना किसी बाधा के पूरे किए जा सकें।
आठ विधेयकों को एजेंडे में किया गया शामिल
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जानकारी दी कि मानसून सत्र के लिए फिलहाल आठ विधेयकों को सूचीबद्ध किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सत्र के दौरान किसी अतिरिक्त विधायी कार्य की आवश्यकता महसूस होती है तो उस पर कार्य मंत्रणा समिति (BAC) में चर्चा की जाएगी और सभी राजनीतिक दलों को समय रहते इसकी जानकारी दी जाएगी। सरकार का कहना है कि वह संसद में लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए गंभीर है, जबकि विपक्ष इन विधेयकों की बारीकी से समीक्षा करने और आवश्यक होने पर उनका विरोध करने की तैयारी में है।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर बढ़ा राजनीतिक तनाव
मानसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा भी राजनीतिक बहस का प्रमुख केंद्र बनने वाला है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी h समेत कई विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि वे महिला आरक्षण का समर्थन करते हैं, लेकिन इसके साथ परिसीमन लागू करने के किसी भी प्रयास का विरोध करेंगे। हालांकि परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक अभी तक आधिकारिक विधायी एजेंडे में शामिल नहीं किया गया है, फिर भी राजनीतिक दलों के बीच इस विषय को लेकर बयानबाजी लगातार तेज हो रही है।
पेपर लीक समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति
विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, प्रशासनिक पारदर्शिता, आर्थिक नीतियों और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। विपक्ष का मानना है कि इन विषयों पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए ताकि जनता के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इन मुद्दों को लेकर सदन के भीतर तीखी बहस और कई बार हंगामे की स्थिति भी बन सकती है।
वंदे मातरम् से जुड़ा संशोधन विधेयक होगा पेश
मानसून सत्र के पहले ही दिन सरकार राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश करने जा रही है। गृह मंत्री अमित शाह ‘राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ को उच्च सदन में प्रस्तुत करेंगे। इस प्रस्तावित संशोधन के तहत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन के दौरान किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न करना या उसका अपमान करना दंडनीय अपराध माना जाएगा। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े प्रतीकों की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से यह संशोधन लाया जा रहा है।
1971 के कानून में होगा संशोधन
यह विधेयक राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन के लिए लाया जा रहा है। मौजूदा कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान करना पहले से ही आपराधिक अपराध है, जिसके लिए तीन वर्ष तक की जेल का प्रावधान है। प्रस्तावित संशोधन के बाद राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान को लेकर भी कानूनी प्रावधान और अधिक स्पष्ट तथा सख्त किए जाने की तैयारी है।