अब बिना इंटरनेट भी चलेगा UPI! नो-नेटवर्क जोन में भी फेल नहीं होगा पेमेंट, NPCI ला रहा नया फीचर
भारत में डिजिटल पेमेंट को और आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। आने वाले समय में यूजर्स को यूपीआई से भुगतान करने के लिए इंटरनेट पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक नई तकनीक पर काम चल रहा है, जिसके जरिए ग्राहक और दुकानदार दोनों के डिवाइस ऑफलाइन होने के बावजूद भुगतान सफलतापूर्वक किया जा सकेगा। यह सुविधा खासतौर पर उन जगहों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, जहां नेटवर्क की समस्या अक्सर बनी रहती है।
NFC तकनीक बनेगी नए सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत
प्रस्तावित व्यवस्था में नियर फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। यदि ग्राहक के पास NFC सपोर्ट वाला स्मार्टफोन है, तो वह केवल फोन को PoS मशीन पर टैप करके भुगतान कर सकेगा। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस सुविधा के तहत एक बार में 2,000 रुपये तक का ट्रांजैक्शन संभव होगा और इसके लिए इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होगी।
2026 से शुरू हो सकता है PoS सर्टिफिकेशन
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) वर्ष 2026 में प्रमुख PoS टर्मिनल बनाने वाली कंपनियों के डिवाइस का सर्टिफिकेशन शुरू कर सकता है। सर्टिफिकेशन मिलने के बाद कंपनियां ऐसे टर्मिनल तैयार करेंगी जो ऑफलाइन मोड में भी भुगतान स्वीकार कर सकें। इससे देशभर के व्यापारियों के लिए नई भुगतान व्यवस्था अपनाना आसान हो जाएगा।
पहले UPI Lite Wallet में करना होगा बैलेंस लोड
इस सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए ग्राहकों को पहले इंटरनेट उपलब्ध होने पर अपने UPI Lite Wallet में राशि जोड़नी होगी। इसके बाद वही बैलेंस ऑफलाइन मोड में खर्च किया जा सकेगा। खास बात यह है कि भुगतान करते समय UPI पिन डालने की भी जरूरत नहीं होगी। यह प्रक्रिया तेज, सुविधाजनक और कम नेटवर्क वाले क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी मानी जा रही है।
हवाई जहाज और मेट्रो जैसी जगहों पर मिलेगा फायदा
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ उन स्थानों पर मिलेगा जहां इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता या बेहद कमजोर होता है। इसमें विमान के अंदर, अंडरग्राउंड मेट्रो नेटवर्क, सुरंगों और दूरदराज के इलाकों जैसी जगहें शामिल हैं। ऐसे स्थानों पर भी ग्राहक आसानी से डिजिटल भुगतान कर सकेंगे और व्यापारियों को भी भुगतान स्वीकार करने में परेशानी नहीं होगी।
ऑफलाइन होने पर भी सुरक्षित रहेगा ट्रांजैक्शन
प्रस्तावित सिस्टम के तहत PoS टर्मिनल भुगतान की अनुमति (Authorization) को अपने सिस्टम में सुरक्षित रखेगा। जैसे ही इंटरनेट कनेक्टिविटी वापस आएगी, यह जानकारी नेटवर्क पर भेज दी जाएगी और ट्रांजैक्शन का अंतिम सत्यापन पूरा हो जाएगा। फिनटेक विशेषज्ञों का कहना है कि इस व्यवस्था को लागू करने के लिए PoS कंपनियों को NPCI से सर्टिफिकेशन लेना अनिवार्य होगा।
UPI Lite X से आगे बढ़ेगी यह नई सुविधा
NPCI ने सितंबर 2023 में UPI Lite X की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य सीमित नेटवर्क की स्थिति में भुगतान को संभव बनाना था। जनवरी 2024 की गाइडलाइंस में NFC आधारित पर्सन-टू-पर्सन और पर्सन-टू-मर्चेंट भुगतान का उल्लेख किया गया था। अब प्रस्तावित फीचर इसी तकनीक को आगे बढ़ाते हुए पारंपरिक PoS टर्मिनलों तक पहुंचाने की तैयारी है, जिससे ऑफलाइन भुगतान का दायरा और व्यापक हो जाएगा।
RBI की मौजूदा लिमिट से अलग हो सकता है नया मॉडल
रिपोर्ट में प्रति ट्रांजैक्शन 2,000 रुपये की सीमा का जिक्र किया गया है, जबकि RBI के मौजूदा ऑफलाइन डिजिटल पेमेंट फ्रेमवर्क में सामान्य ऑफलाइन भुगतान की सीमा 500 रुपये तय है। वहीं किसी एक इंस्ट्रूमेंट पर कुल ऑफलाइन बैलेंस की सीमा 2,000 रुपये और UPI Lite के लिए अलग नियम लागू हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि NPCI का नया मॉडल RBI के मौजूदा नियमों के साथ किस तरह तालमेल बैठाता है।
ग्राहकों की सुरक्षा और नियमों पर रहेगा पूरा फोकस
मौजूदा नियामकीय व्यवस्था के अनुसार ऑफलाइन भुगतान के लिए ग्राहक की स्पष्ट सहमति आवश्यक होती है और ट्रांजैक्शन पूरा होने के बाद जारीकर्ता बैंक को ग्राहक को इसकी जानकारी देनी होती है। यदि तकनीकी या सुरक्षा संबंधी कोई समस्या आती है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित एक्वायरिंग संस्था की होगी। विवाद की स्थिति में ग्राहकों को RBI की इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम के तहत शिकायत दर्ज कराने का अधिकार भी मिलेगा।
तेजी से बढ़ रहे UPI नेटवर्क को मिलेगा नया विस्तार
NPCI के आंकड़ों के अनुसार जून 2026 में UPI के जरिए 22.72 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 28.92 लाख करोड़ रुपये रही। डिजिटल भुगतान का यह लगातार बढ़ता दायरा बताता है कि ऑफलाइन UPI जैसी सुविधा भविष्य में करोड़ों लोगों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। खासकर यात्रा, कम नेटवर्क वाले क्षेत्रों और आपातकालीन परिस्थितियों में यह तकनीक भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को पहले से कहीं अधिक मजबूत और भरोसेमंद बना सकती है।