जम्मू-कश्मीर में CIK का बड़ा एक्शन, कई जिलों में छापेमारी, संदिग्धों के घर खंगाले
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और उससे जुड़े नेटवर्क के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। आतंकियों के खिलाफ सैन्य और पुलिस अभियानों के साथ-साथ अब उन लोगों की भी जांच तेज कर दी गई है, जिन पर आतंकियों को मदद पहुंचाने, संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने या डिजिटल माध्यमों के गलत इस्तेमाल का शक है। इसी कड़ी में जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर-इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) शाखा ने शनिवार, 8 अगस्त को घाटी के कई इलाकों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया।
अधिकारियों के मुताबिक CIK की टीमों ने उत्तर और दक्षिण कश्मीर के कई जिलों में संदिग्ध लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की। अनंतनाग के डूरू क्षेत्र के हिलर शाहबाद से लेकर कुपवाड़ा, बारामूला, शोपियां और बांदीपोरा तक कई स्थानों पर जांच की गई। यह कार्रवाई कथित तौर पर सिम कार्ड के दुरुपयोग, ऑनलाइन गतिविधियों और आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामलों की जांच के तहत की जा रही है।
हिलर शाहबाद में डिजिटल डिवाइस जब्त
अनंतनाग जिले के हिलर शाहबाद इलाके में CIK की एक टीम ने एक संदिग्ध आवास पर तलाशी ली। इस कार्रवाई का नेतृत्व DySP फारूक अहमद कर रहे थे। तलाशी के दौरान जांच टीम ने दो डिजिटल डिवाइस जब्त किए हैं। अधिकारियों के अनुसार इन उपकरणों को CIK कश्मीर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR नंबर 03/2023 की जांच के सिलसिले में कब्जे में लिया गया।
यह मामला IPC की धारा 153A और 505 के साथ-साथ UAPA की धारा 13 और 18 के तहत दर्ज बताया गया है। जांच एजेंसी अब जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनका इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया और क्या इनका किसी संदिग्ध नेटवर्क से संबंध था।
कुपवाड़ा में बाबर हमीद डार के घर छापा
कुपवाड़ा जिले के चनखान इलाके में भी CIK की टीम ने बाबर हमीद डार के आवास पर तलाशी ली। यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर सिम कार्ड के कथित दुरुपयोग से जुड़े एक मामले की जांच के दौरान की गई। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित सिम कार्ड का इस्तेमाल किसने किया और उसका उपयोग किस तरह की गतिविधियों के लिए किया गया।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए ऐसे मामलों में डिजिटल और टेलीकॉम रिकॉर्ड अहम सबूत हो सकते हैं। इसी वजह से छापेमारी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, दस्तावेजों और अन्य संभावित साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
बांदीपोरा के हाजिन में भी तलाशी अभियान
CIK ने बांदीपोरा जिले के हाजिन इलाके में भी कार्रवाई की। मुखदामयारी क्षेत्र में अब्दुल राशिद डार की बेटी लाल्ली के आवास की तलाशी ली गई। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई भी कथित सिम कार्ड दुरुपयोग से जुड़े मामले के सिलसिले में की गई है।
जांच एजेंसी अलग-अलग मामलों में संदिग्ध डिजिटल और संचार गतिविधियों के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही है। ऐसे में छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
पट्टन में राजस्व अधिकारियों की मौजूदगी में तलाशी
बारामूला जिले के पट्टन क्षेत्र में भी CIK की कार्रवाई देखने को मिली। तनत्रेपोरा और पल्हालन इलाके में अबरार नबी शेख के आवास पर तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान पुलिस टीम के साथ स्थानीय राजस्व विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
अधिकारियों ने आवास के भीतर और आसपास के स्थानों की जांच की। CIK की यह कार्रवाई घाटी में संदिग्ध गतिविधियों और संभावित नेटवर्क से जुड़े मामलों की पड़ताल को आगे बढ़ाने के तौर पर देखी जा रही है।
जैनापोरा में UAPA मामले से जुड़ी छापेमारी
दक्षिण कश्मीर के जैनापोरा इलाके में भी काउंटर-इंटेलिजेंस टीम ने तलाशी अभियान चलाया। हशंगपोरा, नागबल स्थित गुलजार अहमद वानी के घर पर CIK की टीम पहुंची। बताया गया कि यह कार्रवाई UAPA से जुड़े मामले की जांच के तहत की गई।
जांच के दौरान एजेंसी ने घर और उससे जुड़े संभावित ठिकानों की तलाशी ली। अधिकारियों का उद्देश्य मामले से संबंधित दस्तावेजों, डिजिटल सामग्री या अन्य संभावित सबूत जुटाना बताया जा रहा है।
गुलजार वानी का बेटा पहले से जेल में बंद
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि गुलजार अहमद वानी का बेटा उस्मान गुलजार पहले से जम्मू की सेंट्रल जेल कोट भलवाल में बंद है। वह जैनापोरा थाने में दर्ज FIR नंबर 104/2022 के मामले में हिरासत में है।
यह मामला हथियार कानून, भारतीय दंड संहिता और UAPA की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। CIK की मौजूदा कार्रवाई इसी तरह के मामलों से जुड़े संभावित नेटवर्क और संपर्कों की जांच के व्यापक अभियान का हिस्सा मानी जा रही है।
ऑनलाइन गतिविधियों और सिम के दुरुपयोग पर नजर
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां अब केवल जमीन पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, मोबाइल कनेक्शन और सिम कार्ड के कथित दुरुपयोग से जुड़े मामलों पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। जांच एजेंसियों को आशंका रहती है कि संचार माध्यमों का इस्तेमाल संदिग्ध नेटवर्क आपसी संपर्क या अन्य गतिविधियों के लिए कर सकते हैं।
इसी वजह से CIK की हालिया छापेमारी में डिजिटल डिवाइस और संचार से जुड़े संभावित सबूतों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। जब्त सामग्री की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि संदिग्धों के बीच किसी तरह का संपर्क या नेटवर्क मौजूद था या नहीं।
कई इलाकों में जांच अभी जारी
CIK की शनिवार की कार्रवाई उत्तर और दक्षिण कश्मीर में एक साथ कई स्थानों पर की गई। बारामूला, शोपियां, अनंतनाग, कुपवाड़ा और बांदीपोरा समेत कई जिलों में तलाशी अभियान चलाया गया। अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई का उद्देश्य संदिग्ध आतंकी गतिविधियों, ऑनलाइन नेटवर्क और कथित कट्टरपंथी गतिविधियों से जुड़े सुराग जुटाना है।