असम में बाढ़ का कहर, अब तक 80 लोगों की मौत, सरकार ने किया मुआवजे का ऐलान
असम में इस साल आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। लगातार हुई अत्यधिक बारिश के कारण राज्य के कई जिले प्रभावित हुए हैं। इस आपदा में अब तक 80 लोगों की मौत हो चुकी है। राहत और पुनर्वास कार्य तेज़ी से जारी हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने प्रभावित परिवारों के लिए कई अहम राहत उपायों और आर्थिक सहायता की घोषणा की है।
मृतकों के परिवारों को कितना मुआवजा मिलेगा?
राज्य सरकार ने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के लिए कुल मुआवजा बढ़ाकर 9 लाख रुपये प्रति परिवार कर दिया है। इसमें 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि और मुख्यमंत्री राहत कोष से अतिरिक्त 5 लाख रुपये शामिल हैं। सरकार ने राहत प्रक्रिया को आसान बनाते हुए यह भी फैसला किया है कि मुआवजा पाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट अनिवार्य नहीं होगी। क्षेत्रीय अधिकारी का प्रमाणपत्र पर्याप्त माना जाएगा। 30 दिन से अधिक समय से लापता लोगों के परिवार भी इस सहायता के पात्र होंगे।
प्रभावित परिवारों को कितनी आर्थिक मदद मिलेगी?
गंभीर रूप से प्रभावित एक लाख से अधिक परिवारों को घरों की सफाई, मामूली मरम्मत और जरूरी घरेलू सामान की खरीद के लिए 15,000 रुपये की एकमुश्त सहायता सीधे बैंक खातों में भेजी जा रही है। इसके अलावा ओरुनोडोई योजना की किस्त भी 1 अगस्त को जारी की जाएगी, जिसे बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है। इस तरह पात्र परिवारों को तत्काल कुल 17,500 रुपये तक की आर्थिक सहायता मिल रही है।
लोन और EMI को लेकर क्या राहत दी गई है?
सबसे अधिक प्रभावित शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों के लोगों को बैंक ऋण की EMI चुकाने के लिए छह महीने की राहत दी गई है। यह फैसला राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की बैठक में लिया गया। साथ ही बैंकों को जरूरत के अनुसार ऋण पुनर्गठन और भुगतान अवधि बढ़ाने पर भी विचार करने को कहा गया है। जिन छोटे कारोबारियों की दुकानें बाढ़ में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, उन्हें बिना नई गारंटी के 10,000 रुपये तक का अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।
छात्रों के लिए सरकार ने क्या इंतजाम किए हैं?
बाढ़ प्रभावित जिलों के स्कूली छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें और यूनिफॉर्म दोबारा उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए सरकार ने 8 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को भी किताबों के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। हायर सेकेंडरी छात्रों को 1,000 रुपये, स्नातक छात्रों को 3,000 रुपये और स्नातकोत्तर छात्रों को 5,000 रुपये दिए जाएंगे। जिन विद्यार्थियों की 10वीं और 12वीं की मार्कशीट या प्रमाणपत्र बाढ़ में नष्ट हो गए हैं, उन्हें संबंधित बोर्ड की ओर से नि:शुल्क दोबारा जारी किया जाएगा।
राहत शिविरों में क्या व्यवस्था की गई है?
राज्य सरकार 112 से अधिक राहत शिविर और वितरण केंद्र संचालित कर रही है, जहां हजारों लोगों को भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयां और अस्थायी आवास उपलब्ध कराया जा रहा है। शिवसागर और चराईदेव जिलों में बाढ़ से क्षतिग्रस्त प्रत्येक नामघर के पुनर्निर्माण के लिए 1.5 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। बाढ़ का पानी घटने के बाद फसलों, मवेशियों और मकानों के नुकसान का आकलन करने के लिए 7 अगस्त से राज्यव्यापी सर्वे शुरू किया जाएगा।
समाज और पार्टी स्तर पर भी राहत अभियान
सरकारी प्रयासों के अलावा भारतीय जनता पार्टी ने भी राहत अभियान शुरू किया है। इसके तहत बाढ़ प्रभावित दो लाख महिलाओं को मेखेला-चादर और दो लाख बच्चों को कपड़े वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री राहत कोष में भी अब तक 26 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक का योगदान प्राप्त हो चुका है।
केंद्र सरकार से क्या मांग की गई है?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास, बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण और आजीविका बहाल करने के लिए केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज की मांग की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी असम को हरसंभव केंद्रीय सहायता देने का भरोसा दिया है। फिलहाल राज्य और केंद्र सरकार के बीच इस संबंध में बातचीत जारी है।