GST काउंसिल के बड़े फैसले; गिरफ्तारी से ITC तक बदले कई नियम, कारोबारियों को मिली राहत
GST Council Meeting: जीएसटी से जुड़े कामकाज को आसान बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में टैक्सपेयर्स और कारोबारियों के लिए कई अहम प्रक्रियात्मक बदलावों पर मुहर लगी। इस बार फोकस टैक्स की दरों में बदलाव करने के बजाय GST सिस्टम को सरल, तेज और ज्यादा ऑटोमेटेड बनाने पर रहा।
बैठक में रजिस्ट्रेशन से लेकर रिटर्न, रिफंड, इनपुट टैक्स क्रेडिट और माल की आवाजाही तक कई नियमों को आसान बनाने का फैसला किया गया है। सबसे अहम बदलाव गिरफ्तारी, नोटिस और जांच से जुड़े प्रावधानों में बताया गया है। इसके अलावा छोटे कारोबारियों और ई-कॉमर्स से जुड़े सेलर्स के लिए भी प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में फैसले लिए गए हैं।
GST Registration होगा और आसान
जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कम जोखिम वाले कारोबारियों के आवेदन को सिस्टम खुद प्रोसेस करेगा। ऐसे मामलों में करीब 3 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन मिलने की व्यवस्था की जा रही है और इसमें अधिकारी के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होगी। फिलहाल करीब 61 फीसदी रजिस्ट्रेशन इसी ऑटोमेटेड तरीके से हो रहे हैं।
नाम, पता या डायरेक्टर से जुड़े बदलावों के लिए भी प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा। ऐसे आवेदनों को सिस्टम के जरिए ऑटोमेटिक मंजूरी देने की व्यवस्था की जा रही है।
रिटर्न में पुरानी गलतियां सुधारने का मौका
रिटर्न में डेटा के मामूली अंतर को लेकर बड़ी संख्या में नोटिस जारी होने की समस्या को कम करने पर भी जोर दिया गया है। हर साल करीब 95 हजार नोटिस डेटा में अंतर के कारण जारी होते हैं, लेकिन इन मामलों में वसूली बेहद कम रहती है।
अब बिल में गलती या कमी होने पर उसे सेल्स स्टेटमेंट में सुधारने की व्यवस्था को आसान किया जाएगा। इसके साथ ही पुराने रिकॉर्ड में गलत GSTIN जैसी गलतियों को ठीक करने का विकल्प भी दिया जाएगा।
रिफंड के लिए नहीं करना होगा लंबा इंतजार
रिफंड प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया गया है। रिफंड क्लेम स्वीकार करने की समय सीमा को 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का फैसला किया गया है। वहीं करीब 90 फीसदी मामलों में सिस्टम खुद रिफंड को तीन दिन के भीतर प्रोसेस कर सकेगा।
कैश लेजर में अतिरिक्त राशि पड़ी होने की स्थिति में उसे वापस पाने की प्रक्रिया भी ऑटोमेटेड की जाएगी। इससे कारोबारियों का पैसा लंबे समय तक सिस्टम में अटका नहीं रहेगा।
छोटे मामलों में नोटिस पर लगेगी रोक
जीएसटी से जुड़े छोटे मामलों को लेकर भी राहत की व्यवस्था की गई है। 10 हजार रुपये से कम के मामलों में नोटिस जारी नहीं करने का प्रावधान किया गया है। साथ ही नोटिस, सुनवाई और आदेश की प्रक्रिया के लिए एक तय मानक बनाने पर जोर दिया गया है। इसका मकसद छोटे मामलों में अनावश्यक कानूनी प्रक्रिया और कागजी कार्रवाई को कम करना है।
ITC को लेकर कारोबारियों को राहत
इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC से जुड़े नियमों में भी कई बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। जिन खरीदारों के पास सही बिल है, माल प्राप्त हो चुका है और भुगतान भी पूरा किया जा चुका है, उनके हितों की सुरक्षा के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी। यह कमेटी तीन महीने में अपनी रिपोर्ट देगी।
इसके अलावा कर्मचारियों के हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस, टेलीकॉम टावर, फैक्ट्री के बाहर की पाइपलाइन और नष्ट किए जाने वाले एक्सपायर्ड फ्री सैंपल जैसे कुछ खर्चों पर ITC का लाभ देने की व्यवस्था की गई है।
एक ही सर्विस की सप्लाई चेन में बार-बार टैक्स लगने की समस्या को भी दूर करने का प्रयास किया गया है। एजेंट के जरिए होटल बुकिंग, रेस्टोरेंट और ट्रांसपोर्ट जैसी सेवाओं के कुछ मामलों में डबल टैक्सेशन को कम करने की व्यवस्था की जाएगी।
छोटे कारोबारियों के लिए आसान होगा GST
कारोबार बंद करने की प्रक्रिया को भी सरल बनाने का फैसला किया गया है। छोटे टैक्सपेयर्स के लिए कैंसिलेशन की प्रक्रिया ऑटोमेटिक करने की दिशा में कदम उठाया गया है और आखिरी रिटर्न को भी इसी प्रक्रिया से जोड़ने की व्यवस्था होगी।
5 करोड़ रुपये तक का टर्नओवर रखने वाले और सीधे ग्राहकों को सामान बेचने वाले कारोबारियों के लिए रिटर्न फाइलिंग को भी आसान बनाया गया है। ऐसे व्यापारी साल में एक बार रिटर्न दाखिल करेंगे, जबकि टैक्स का भुगतान तिमाही आधार पर किया जा सकेगा।
सड़क पर माल की चेकिंग के नियम बदले
माल लेकर जा रहे वाहनों की जांच को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब किसी वाहन को केवल मनमाने तरीके से रोकने की गुंजाइश कम की जाएगी। इसके लिए जॉइंट कमिश्नर स्तर के अधिकारी की मंजूरी और ठोस खुफिया जानकारी की जरूरत होगी।
माल की जांच मुख्य रूप से उस राज्य में की जाएगी जहां से माल भेजा गया है या जहां माल पहुंचना है। बीच में पड़ने वाले ट्रांजिट राज्य में अनावश्यक रोक-टोक को सीमित करने का प्रावधान किया गया है।
GST में गिरफ्तारी और मुकदमे के नियम बदले
जीएसटी से जुड़े मामलों में गिरफ्तारी के प्रावधान को हटाने का फैसला बैठक के प्रमुख बदलावों में शामिल है। वहीं मुकदमा चलाने की सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये किया गया है।
सामान्य जुर्माने की राशि को भी 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये करने का फैसला किया गया है। इन बदलावों का उद्देश्य छोटे और प्रक्रियात्मक मामलों में कठोर कार्रवाई की जरूरत को कम करना है।
एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों को राहत
विदेशी ग्राहकों को सर्विस देने वाली भारतीय कंपनियों के लिए भी नियम आसान किए गए हैं। यदि कोई भारतीय कंपनी विदेश में अपनी ही ब्रांच के माध्यम से विदेशी ग्राहक को सेवा देती है, तो उसे एक्सपोर्ट से जुड़े लाभ मिल सकेंगे।
इसी तरह अगर कोई विदेशी ग्राहक अपना सामान भारत भेजकर यहां उसकी टेस्टिंग, रिपेयरिंग या रिसर्च करवाता है, तो ऐसी सेवाओं को भी सर्विस एक्सपोर्ट के तौर पर मानने की व्यवस्था की गई है।
ई-कॉमर्स सेलर्स के लिए भी बड़ा बदलाव
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर में सामान बेचने वाले छोटे कारोबारियों के लिए भी प्रक्रिया आसान करने का फैसला हुआ है। अब कुछ मामलों में सेलर दूसरे राज्य में मौजूद ई-कॉमर्स कंपनी के वेयरहाउस को अपना प्रिंसिपल प्लेस ऑफ बिजनेस दिखा सकेंगे।
इससे छोटे व्यापारी अपने राज्य से कारोबार करते हुए देश के दूसरे हिस्सों में भी सामान बेच सकेंगे। अलग-अलग ई-कॉमर्स बिजनेस मॉडल के लिए GST नियमों में समानता लाने पर भी जोर दिया गया है।
फिलहाल GST की दरों में कोई बदलाव नहीं
जीएसटी काउंसिल की इस बैठक में किसी वस्तु या सेवा की टैक्स दर में बदलाव नहीं किया गया है। दरों में बदलाव पर अब साल में एक बार अलग बैठक में विचार करने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। यानी इस बार काउंसिल का मुख्य फोकस टैक्स रेट बदलने के बजाय GST सिस्टम की प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर रहा। रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड, ITC, जांच और ई-कॉमर्स से जुड़े बदलावों के जरिए कारोबारियों के लिए अनुपालन को कम जटिल बनाने की कोशिश की गई है।