एक क्लिक और खाली हो सकता है बैंक अकाउंट! ऐसे पहचानें फर्जी वेबसाइट और ऐप
इंटरनेट पर मिलने वाला हर ऑफर फायदेमंद नहीं होता और न ही हर ऐप भरोसेमंद होता है। कई बार कुछ रुपये बचाने या आकर्षक छूट पाने के चक्कर में लोग ऐसी वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं, जो उनकी निजी जानकारी और बैंक खाते में जमा रकम चुराने के लिए बनाई गई होती हैं। साइबर ठग अब नामी कंपनियों की हूबहू नकल करके फर्जी वेबसाइट और मोबाइल ऐप तैयार कर रहे हैं। ऐसे में एक छोटी सी लापरवाही भी आर्थिक नुकसान की वजह बन सकती है। अगर आप भी ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं या नए ऐप डाउनलोड करते हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखकर इस तरह की धोखाधड़ी से बच सकते हैं।
वेबसाइट का URL देखकर करें असली-नकली की पहचान
किसी भी वेबसाइट पर अपनी निजी जानकारी या बैंकिंग डिटेल भरने से पहले उसका वेब एड्रेस यानी URL जरूर जांचें। साइबर अपराधी अक्सर लोकप्रिय कंपनियों के नाम से मिलते-जुलते लिंक बनाते हैं। इनमें किसी अक्षर की स्पेलिंग बदल दी जाती है या नाम के साथ कोई अतिरिक्त शब्द जोड़ दिया जाता है। ऐसे लिंक पहली नजर में असली लग सकते हैं, लेकिन ध्यान से देखने पर अंतर पकड़ में आ सकता है। इसलिए सोशल मीडिया, ईमेल या मैसेज में मिले अनजान लिंक पर सीधे क्लिक करने के बजाय संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट का पता खुद टाइप करके खोलना ज्यादा सुरक्षित है।
वेबसाइट की भाषा और डिजाइन भी दे सकते हैं संकेत
किसी वेबसाइट की विश्वसनीयता जांचने के लिए उसके डिजाइन और कंटेंट पर भी ध्यान देना जरूरी है। फर्जी वेबसाइट पर कई बार गलत स्पेलिंग, व्याकरण की गलतियां, धुंधली तस्वीरें और खराब डिजाइन देखने को मिल सकते हैं। इसके अलावा, वेबसाइट के अलग-अलग पेज खोलने पर गलत लिंक या संदिग्ध पेज पर पहुंचने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। हालांकि, केवल अच्छी डिजाइन या पेशेवर दिखने के आधार पर किसी वेबसाइट को सुरक्षित नहीं मानना चाहिए। ठग असली कंपनियों जैसी दिखने वाली वेबसाइट भी बना सकते हैं, इसलिए दूसरी जानकारियों की जांच करना भी जरूरी है।
सस्ते ऑफर और भारी डिस्काउंट के लालच से बचें
ऑनलाइन ठगी के लिए साइबर अपराधी अक्सर ऐसे ऑफर का इस्तेमाल करते हैं, जिन्हें देखकर ग्राहक तुरंत खरीदारी करने के लिए आकर्षित हो जाएं। किसी महंगे स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक सामान या ब्रांडेड प्रोडक्ट पर अगर सामान्य कीमत से बहुत ज्यादा छूट मिल रही है, तो सावधान हो जाएं। इसी तरह, ‘ऑफर कुछ ही मिनटों में खत्म हो जाएगा’ या ‘अभी खरीदें और बड़ा इनाम पाएं’ जैसे संदेशों के दबाव में आकर भुगतान न करें। खरीदारी से पहले उसी प्रोडक्ट की कीमत कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या विश्वसनीय प्लेटफॉर्म पर जांच लें। जरूरत से ज्यादा आकर्षक ऑफर के पीछे धोखाधड़ी की आशंका हो सकती है।
वेबसाइट पर कंपनी की जानकारी और संपर्क विवरण जांचें
किसी वेबसाइट से खरीदारी करने या उस पर अपनी जानकारी साझा करने से पहले यह देख लें कि वहां कंपनी का पता, कस्टमर केयर की जानकारी, रिटर्न पॉलिसी और रिफंड से जुड़ी शर्तें दी गई हैं या नहीं। अगर संपर्क करने का कोई भरोसेमंद तरीका नहीं है या उपलब्ध जानकारी अधूरी और संदिग्ध लगती है, तो सतर्क रहना चाहिए। जरूरत पड़ने पर कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट से संपर्क विवरण की पुष्टि करें। वेबसाइट के URL में HTTPS होना भी सुरक्षित कनेक्शन का संकेत है, लेकिन सिर्फ लॉक आइकन देखकर किसी साइट पर भरोसा न करें। सुरक्षित कनेक्शन होने का मतलब यह नहीं है कि वेबसाइट धोखाधड़ी से पूरी तरह मुक्त है।
ऐप डाउनलोड करने से पहले रिव्यू और परमिशन पर दें ध्यान
मोबाइल में कोई नया ऐप इंस्टॉल करने से पहले उसके डेवलपर का नाम, डाउनलोड की संख्या और यूजर रिव्यू जरूर पढ़ें। अगर किसी लोकप्रिय ऐप के नाम से मिलता-जुलता ऐप दिखाई दे या उसके रिव्यू में बार-बार धोखाधड़ी और खराब अनुभव की शिकायतें मिलें, तो उसे डाउनलोड करने से बचें। ऐप किन परमिशन की मांग कर रहा है, यह देखना भी जरूरी है। उदाहरण के लिए, अगर किसी सामान्य शॉपिंग ऐप को कॉन्टैक्ट्स, कॉल लॉग या ऐसी जानकारियों का एक्सेस चाहिए, जिनकी उसे जरूरत नहीं होनी चाहिए, तो सावधान हो जाएं। ध्यान रखें कि अच्छी रेटिंग और ज्यादा डाउनलोड होने के बावजूद किसी ऐप के सुरक्षित होने की पूरी गारंटी नहीं होती।
Google Play Protect की मदद से भी रहें सुरक्षित
Android स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले लोग Google Play Protect को चालू रख सकते हैं। यह संभावित रूप से नुकसान पहुंचाने वाले ऐप की जांच करने और संदिग्ध गतिविधियों के बारे में चेतावनी देने में मदद करता है। ऐप डाउनलोड करने के लिए आधिकारिक ऐप स्टोर का इस्तेमाल करें और किसी अनजान वेबसाइट से APK फाइल डाउनलोड करने से बचें। इसके अलावा, फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप्स को समय-समय पर अपडेट करते रहें। अगर कोई ऐप अनावश्यक परमिशन मांगता है या उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगती हैं, तो उसे इंस्टॉल करने से पहले दोबारा जांच करें। इन सावधानियों से फोन और उसमें मौजूद निजी जानकारी की सुरक्षा बेहतर बनाई जा सकती है।
ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए जल्दबाजी में न लें फैसला
फर्जी वेबसाइट और ऐप से बचने का सबसे आसान तरीका है कि किसी भी लिंक, ऑफर या डाउनलोड पर भरोसा करने से पहले उसकी जांच की जाए। किसी अनजान व्यक्ति या वेबसाइट के साथ OTP, पासवर्ड, PIN और बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा न करें। अगर गलती से किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक कर दिया है, तो वहां अपनी निजी जानकारी भरने या भुगतान करने से बचें। यदि आपके साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है, तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें और भारत के साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। थोड़ी सी सतर्कता आपको आर्थिक नुकसान और निजी जानकारी के दुरुपयोग से बचाने में मदद कर सकती है।