DRDO ने किया ‘कुशा’ मिसाइल का सफल टेस्ट, हवा में ही तबाह होगा दुश्मन, ताकत जान बौखला उठेंगे चीन-पाक!
भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है और अब स्वदेशी तकनीक के दम पर उसने एयर डिफेंस के क्षेत्र में भी बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के तट पर स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से ‘कुशा’ लॉन्ग-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम का पहला सफल फ्लाइट टेस्ट पूरा किया। इस परीक्षण के दौरान मिसाइल ने एक तेज रफ्तार और अधिक ऊंचाई पर उड़ रहे इलेक्ट्रॉनिक टारगेट को सटीक तरीके से इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। यह सफलता इस बात का संकेत है कि भारत अब अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए अत्याधुनिक स्वदेशी रक्षा प्रणालियों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
हर तरह के हवाई खतरे से निपटने में सक्षम
कुशा’ मिसाइल सिस्टम को इस तरह विकसित किया गया है कि यह आधुनिक युद्ध के लगभग हर प्रकार के हवाई खतरे का मुकाबला कर सके। चाहे दुश्मन के फाइटर जेट हों, क्रूज मिसाइलें, बैलिस्टिक मिसाइलें, ड्रोन, यूएवी या बड़े सैन्य विमान, यह सिस्टम उन्हें लंबी दूरी से ही पहचानकर निशाना बना सकता है। इसकी खासियत यह भी है कि मिसाइल, रडार, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और पूरे हथियार सिस्टम के सभी प्रमुख हिस्से भारत में ही विकसित किए गए हैं, जिससे देश की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता को और मजबूती मिली है।
क्यों कहा जा रहा है इसे स्वदेशी S-400?
रक्षा विशेषज्ञ ‘कुशा’ की तुलना रूस के S-400 ट्रायम्फ और अमेरिका के पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम से कर रहे हैं। इसकी वजह इसकी लंबी दूरी तक दुश्मन के हवाई लक्ष्यों को ट्रैक और इंटरसेप्ट करने की क्षमता है। आधुनिक रडार और एडवांस सीकर तकनीक की मदद से यह सिस्टम स्टील्थ फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल, बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन जैसे मुश्किल लक्ष्यों को भी प्रभावी ढंग से नष्ट कर सकता है। यदि यह सिस्टम पूरी तरह सेना में शामिल होता है तो भारत की बहुस्तरीय एयर डिफेंस क्षमता पहले से कहीं अधिक मजबूत हो जाएगी।
तीन इंटरसेप्टर मिसाइलों से मिलेगा बहुस्तरीय सुरक्षा कवच
‘कुशा’ एयर डिफेंस सिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी तीन अलग-अलग इंटरसेप्टर मिसाइलें हैं। M-1 इंटरसेप्टर लगभग 150 किलोमीटर तक के हवाई लक्ष्यों को मार गिराने में सक्षम होगी, जबकि M-2 इंटरसेप्टर की मारक क्षमता करीब 250 किलोमीटर तक होगी। वहीं सबसे उन्नत M-3 इंटरसेप्टर 350 से 400 किलोमीटर की दूरी तक मौजूद दुश्मन के हवाई खतरों को नष्ट करने के लिए तैयार किया गया है। यह बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था युद्ध के दौरान विभिन्न दूरी पर आने वाले खतरों से एक साथ निपटने में मदद करेगी।
रक्षा मंत्री ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि
कुशा’ सिस्टम की मिसाइलें मैक 5.5 यानी आवाज की गति से लगभग साढ़े पांच गुना अधिक रफ्तार से लक्ष्य की ओर बढ़ सकती हैं। इतनी तेज गति के कारण दुश्मन के लिए प्रतिक्रिया देने का समय बेहद कम रह जाता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण को भारत के रक्षा इतिहास का महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि से देश की आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में और मजबूती से शामिल होगा, जिनके पास अत्याधुनिक लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम विकसित करने की स्वदेशी क्षमता मौजूद है।