JPSC विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, झारखंड सरकार के फैसले पर लगाई रोक
झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच गुरुवार को हाईकोर्ट के फैसले ने सैकड़ों-हजारों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। राज्य सरकार ने हाल ही में JPSC की 36 परीक्षाएं रद्द और छह परीक्षाएं स्थगित कर दी थीं। इस फैसले का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ा था, जो इन्हीं परीक्षाओं के जरिए सरकारी सेवाओं में नियुक्त हो चुके थे। नौकरी जाने की आशंका के बीच मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने परीक्षाएं रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी।
याचिकाओं पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट का आदेश
JPSC की प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने के सरकारी आदेश के खिलाफ कई याचिकाएं झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल की गई थीं। जस्टिस दीपक रौशन की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा। सौरभ सिंह, अवधेश कुमार, दीप माला और सोनम कुमारी की याचिकाओं समेत अन्य मामलों पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने संबंधी सरकारी फैसले पर रोक लगा दी। अदालत के इस आदेश से उन अधिकारियों और अभ्यर्थियों को तत्काल राहत मिली है, जिनकी नियुक्ति इन परीक्षाओं के परिणामों के आधार पर हुई थी।
छात्र आंदोलन के बाद सरकार ने रद्द की थीं परीक्षाएं
JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों ने आंदोलन शुरू किया था। करीब 26 दिनों तक चले प्रदर्शन के बाद सरकार ने 22 परीक्षाएं रद्द करने और 23 परीक्षाओं की CID जांच कराने की घोषणा की थी। साथ ही परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का भरोसा दिया गया था। सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले का असर 2300 से अधिक अभ्यर्थियों की नौकरियों पर पड़ने की बात सामने आई थी। कैबिनेट ने JSSC-CGL परीक्षा के साथ आउटसोर्स एजेंसी TDPL की ओर से आयोजित परीक्षाओं और उनके जारी परिणामों को भी रद्द करने का फैसला किया था।
दो महीने में रिपोर्ट देगी परीक्षा सुधार समिति
JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए बनाई गई IAS अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली समिति को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है। समिति परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देगी। दूसरी ओर, हाईकोर्ट की ओर से परीक्षा रद्द करने के फैसले पर रोक लगाए जाने के बाद अब सरकार के लिए आगे की कार्रवाई का रास्ता कानूनी समीक्षा के आधार पर तय करना होगा। फिलहाल अदालत के आदेश ने उन नियुक्त अधिकारियों और अभ्यर्थियों को राहत दी है, जिनकी नौकरी पर भर्ती परीक्षाओं के रद्द होने के बाद तलवार लटक गई थी।