कोलकाता में बड़ा हादसा; दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ से 17 लोगों की मौत, मची चीख-पुकार
कोलकाता में दुर्गा पूजा के उल्लास के बीच सप्तमी की शाम एक दर्दनाक घटना की खबर सामने आई। चोरबागान सार्वजनीन दुर्गोत्सव समिति के पंडाल में मां दुर्गा के दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। इसी दौरान तेज बारिश शुरू होने के बाद पंडाल में भीड़ बढ़ गई और भगदड़ जैसे हालात पैदा हो गए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हादसे में 17 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को कलकत्ता मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य भी घायलों का हाल जानने अस्पताल पहुंचे।
बारिश के बीच बढ़ी भीड़, अचानक बिगड़े हालात
आयोजकों के मुताबिक, सप्तमी की शाम करीब 7:30 बजे पंडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद थी। इसी दौरान बारिश शुरू होने पर लोग उससे बचने के लिए पंडाल के भीतर जाने लगे। इससे प्रवेश और निकास के रास्तों पर भीड़ का दबाव बढ़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने आशंका जताई कि पंडाल के किसी हिस्से या उसके स्ट्रक्चर में गड़बड़ी के कारण भी हादसा हुआ हो सकता है। हालांकि, कुछ लोगों का कहना है कि एक साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से भगदड़ जैसी स्थिति बनी। घटना की वास्तविक वजह का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।
पंडाल का हिस्सा गिरने की चर्चा, लोगों ने सुनाई आपबीती
घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि अचानक अफरा-तफरी मचने से श्रद्धालु अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। एक दर्शनार्थी के मुताबिक, उसने पंडाल का हिस्सा गिरने की बात सुनी थी, जिसके बाद लोग भागने लगे और कई लोग गिरकर भीड़ के नीचे दब गए। वहीं, दूसरे प्रत्यक्षदर्शियों ने बारिश के दौरान पंडाल में बढ़ती भीड़ को हादसे की संभावित वजह बताया। स्थानीय लोगों के अनुसार, पंडाल से बाहर निकलने के लिए बने गोलाकार गलियारे में भी लोगों को घूमकर आगे बढ़ना पड़ता है। शुरुआती जानकारी में इस कॉरिडोर में भी हादसा होने की आशंका जताई गई है।
भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन इंतजामों पर उठे सवाल
हादसे के बाद स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं ने आयोजन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस और स्वयंसेवकों की मौजूदगी के बावजूद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया कि मौके पर पर्याप्त एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं थीं और घायलों की मदद के लिए आसपास के लोगों को आगे आना पड़ा। कुछ निवासियों ने पार्किंग और रास्तों की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। हालांकि, ये आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। हादसे के बाद राहत व्यवस्था तथा भीड़ प्रबंधन की भूमिका जांच का अहम विषय बन सकती है।