Navratri 2026: नवरात्रि में दीपक जलाते समय इन बातों का रखें ध्यान, जानें घी और तेल से जुड़े नियम
शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ दीपक जलाने की भी विशेष परंपरा है। भक्त इन नौ दिनों में माता रानी की कृपा पाने के लिए घरों में पूजा करते हैं और कई लोग अखंड ज्योति भी जलाते हैं। हालांकि, पूजा के दौरान अक्सर यह सवाल उठता है कि मां दुर्गा के सामने घी का दीपक जलाना चाहिए या तेल का? इसके अलावा दीपक को किस दिशा में रखना शुभ माना जाता है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक जलाने के तरीके और उसकी दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। आइए जानते हैं नवरात्रि में दीपक जलाने से जुड़े जरूरी नियम।
नवरात्रि में मां दुर्गा के सामने कौन सा दीपक जलाएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के दौरान गाय के शुद्ध देसी घी, तिल के तेल या सरसों के तेल का दीपक जलाया जा सकता है। घी के दीपक को सात्विकता और शुभता का प्रतीक माना जाता है, जबकि तिल और सरसों के तेल के दीपक को कुछ परंपराओं में नकारात्मकता से बचाव की कामना से जोड़कर देखा जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा, पारिवारिक परंपरा और पूजा विधि के अनुसार दीपक का चुनाव कर सकते हैं।
घी का दीपक जलाने की क्या है मान्यता?
नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के सामने घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में घी को पवित्रता और सात्विकता से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि पूजा के समय घी का दीपक जलाने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और भक्तों का मन पूजा में एकाग्र होता है। अगर आप नवरात्रि में नियमित रूप से मां दुर्गा की आराधना करते हैं, तो अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार घी का दीपक जला सकते हैं।
घी का दीपक किस दिशा में रखना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा के सामने घी का दीपक उनके दाहिने हाथ की ओर रखना शुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि पूजा करने वाले व्यक्ति की तरफ से देखने पर दीपक बाईं ओर रखा जाएगा। हालांकि, अलग-अलग पूजा परंपराओं में दिशा और व्यवस्था को लेकर अंतर हो सकता है। इसलिए अपने परिवार में प्रचलित पूजा विधि का पालन करना उचित माना जाता है।
तिल या सरसों के तेल का दीपक जलाने के नियम
अगर आप घी के बजाय तेल का दीपक जलाना चाहते हैं, तो नवरात्रि में तिल या सरसों के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन तेलों के दीपक को विशेष महत्व दिया जाता है। कुछ परंपराओं में इन्हें संकटों से मुक्ति और नकारात्मकता दूर करने की प्रार्थना से जोड़ा जाता है। हालांकि, पूजा में किस तेल का इस्तेमाल करना है, यह व्यक्ति की आस्था और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है।
तेल का दीपक किस दिशा में रखना शुभ माना जाता है?
मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा के सामने तेल का दीपक उनके बाएं हाथ की ओर रखा जाता है। पूजा करने वाले व्यक्ति की तरफ से देखने पर यह दिशा दाईं ओर होगी। दीपक रखते समय पूजा स्थल की साफ-सफाई और व्यवस्था का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही, दीपक को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां वह स्थिर रहे और हवा के कारण बुझने या गिरने का खतरा न हो।
नवरात्रि में दीपक की बत्ती कैसी होनी चाहिए?
मां दुर्गा की पूजा के दौरान दीपक में रुई की बत्ती का इस्तेमाल किया जा सकता है। धार्मिक परंपराओं में एकमुखी और दोमुखी बत्ती का भी उल्लेख मिलता है। कुछ मान्यताओं में दोमुखी बत्ती को विशेष शुभता और मनोकामना पूर्ति की कामना से जोड़ा जाता है। भक्त अपनी पूजा पद्धति के अनुसार बत्ती का चुनाव कर सकते हैं। दीपक में पर्याप्त घी या तेल रखें, ताकि पूजा के दौरान उसे बार-बार ठीक करने की जरूरत न पड़े।
अखंड ज्योति जलाते समय इन बातों का रखें ध्यान
नवरात्रि में कई श्रद्धालु नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाते हैं।ऐसी मान्यता है कि अखंड ज्योति देवी के प्रति निरंतर श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। यदि आप भी अखंड ज्योति जलाने की परंपरा निभा रहे हैं, तो दीपक को मजबूत और स्थिर स्थान पर रखें। उसे पर्दों, कागज, कपड़ों और दूसरी ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें। आग लगने के खतरे से बचने के लिए उचित सावधानी बरतें और दीपक को बिना निगरानी के न छोड़ें। धार्मिक परंपराओं का पालन करते समय सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. Khabar Nest इसकी पुष्टि नहीं करता है.