NEET UG Counselling: एडमिशन प्रक्रिया होगी पहले से ज्यादा आसान, छात्रों को बार-बार नहीं जाना पड़ेगा कॉलेज
देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए NEET UG Counselling 2026 इस बार कई अहम बदलावों के साथ शुरू होने जा रही है। केंद्र सरकार ने पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और छात्र हितैषी बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने अधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि काउंसलिंग के दौरान किसी भी अभ्यर्थी को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना चाहिए। इसी उद्देश्य से तकनीकी व्यवस्था, साइबर सुरक्षा, शिकायत निवारण और एडमिशन प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं।
एक बार कॉलेज रिपोर्टिंग से पूरी होगी एडमिशन प्रक्रिया
इस वर्ष सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि अभ्यर्थियों को बार-बार कॉलेज जाकर रिपोर्टिंग नहीं करनी होगी। सीट आवंटन के बाद छात्र ऑनलाइन माध्यम से फ्रीज या फ्लोट विकल्प का चयन कर सकेंगे। यदि कोई उम्मीदवार फ्रीज विकल्प चुनता है तो उसे निर्धारित समय पर संस्थान में जाकर मूल दस्तावेजों का सत्यापन और प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी होगी। वहीं फ्लोट विकल्प चुनने वाले अभ्यर्थी बेहतर सीट मिलने की उम्मीद में अगले राउंड में शामिल रहेंगे और इस दौरान उन्हें कॉलेज जाकर रिपोर्ट करने या फीस जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। अंतिम सीट मिलने के बाद ही संस्थान में जाकर औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
ऑनलाइन होगी सीट छोड़ने और दस्तावेज सत्यापन की सुविधा
मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) ने इस बार पूरी प्रक्रिया को अधिक डिजिटल बनाने पर जोर दिया है। उम्मीदवार अब निर्धारित समय सीमा के भीतर एमसीसी पोर्टल के जरिए ऑनलाइन ही अपनी सीट छोड़ सकेंगे। पहले इसके लिए कॉलेज जाकर औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती थीं। इसके अलावा फ्लोट विकल्प चुनने वाले अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन भी ऑनलाइन किया जाएगा, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बचत होगी तथा काउंसलिंग प्रक्रिया अधिक सरल बनेगी।
दिव्यांग और एनआरआई अभ्यर्थियों को मिली विशेष सुविधा
इस बार बेंचमार्क दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए मूल्यांकन केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 61 कर दी गई है, जिससे उन्हें लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता कम होगी। मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी प्रमाणपत्र को अब ‘एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट’ के रूप में मान्यता दी जाएगी। यदि कोई उम्मीदवार मेडिकल बोर्ड के निर्णय से संतुष्ट नहीं है तो उसके लिए अपीलीय दिव्यांग मूल्यांकन बोर्ड की भी व्यवस्था की गई है। वहीं एनआरआई श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल कर दी गई है। दस्तावेज अपलोड करने से लेकर उनके सत्यापन तक का पूरा काम अब ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होगा।
साइबर सुरक्षा और हेल्पलाइन व्यवस्था को किया गया मजबूत
काउंसलिंग के दौरान तकनीकी समस्याओं और साइबर खतरों से बचाव के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के सहयोग से आईटी सिस्टम और साइबर सुरक्षा को पहले से अधिक मजबूत बनाया गया है। इसके साथ ही अभ्यर्थियों की हर समस्या का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए 24 घंटे संचालित होने वाली टोल-फ्री हेल्पलाइन और ईमेल सहायता सेवा भी शुरू की गई है। सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी छात्र को जानकारी के अभाव या तकनीकी दिक्कत के कारण एडमिशन प्रक्रिया में नुकसान न उठाना पड़े।
जल्द शुरू होगी काउंसलिंग
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा NEET UG 2026 का परिणाम घोषित किए जाने के बाद अब एमबीबीएस, बीडीएस और बीएससी (ऑनर्स.) नर्सिंग की ऑल इंडिया कोटा सीटों के लिए काउंसलिंग जल्द शुरू होने की उम्मीद है। समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पूरी प्रक्रिया के दौरान पोर्टल बिना किसी बाधा के संचालित रहे, शिकायतों का समय पर समाधान किया जाए और प्रत्येक सीट का आवंटन पूरी तरह मेरिट और पारदर्शिता के आधार पर किया जाए। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक भरोसेमंद, सुविधाजनक और तकनीक-संचालित बनाएगी।