Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी को करना है प्रसन्न? पूजा के दौरान इन गलतियों से जरूर बचें
हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी की आराधना और सुख-समृद्धि की कामना के लिए बेहद खास माना जाता है। इसे कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस साल यह पर्व रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात मां लक्ष्मी की पूजा करने और सात्विक जीवनशैली अपनाने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। हालांकि, पूजा के दौरान कुछ नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है। आइए जानते हैं कि शरद पूर्णिमा की रात किन चीजों से परहेज करना चाहिए और पूजा करते समय किन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए।
तामसिक भोजन से बनाएं दूरी
शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा करते समय शुद्धता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मांस, मछली, अंडे और मदिरा जैसी तामसिक चीजों से दूरी बनानी चाहिए। पूजा में चढ़ाए जाने वाले प्रसाद और भोग में भी लहसुन-प्याज का इस्तेमाल करने से परहेज किया जाता है। मान्यता है कि देवी-देवताओं की आराधना के दौरान सात्विक भोजन और स्वच्छ वातावरण बनाए रखना शुभ होता है। इसलिए पूजा से पहले भोग की सामग्री तैयार करते समय उसकी शुद्धता का ध्यान रखें और श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी की आराधना करें।
काले कपड़े और खंडित पूजा सामग्री का न करें इस्तेमाल
शरद पूर्णिमा की पूजा में साफ-सफाई और पूजा सामग्री की पवित्रता का विशेष महत्व माना जाता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूजा के लिए काले वस्त्र पहनने से बचने और लाल, पीले या हल्के रंग के साफ कपड़े धारण करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा पूजा में टूटी हुई मूर्तियों, खंडित चावल और गंदे बर्तनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पूजा की थाली, दीपक, फूल और भोग के बर्तन साफ होने चाहिए। पूजा स्थल को व्यवस्थित और स्वच्छ रखने से धार्मिक वातावरण सकारात्मक बना रहता है। हालांकि, इन रंगों और वस्तुओं से जुड़े नियम अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं।
क्रोध, विवाद और अपमान से बचें
शरद पूर्णिमा का महत्व केवल पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे मन की शांति और अच्छे आचरण से भी जोड़कर देखा जाता है। इस दिन परिवार के सदस्यों के साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करना, बुजुर्गों का सम्मान करना और जरूरतमंदों की मदद करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के समय क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। घर में बेवजह विवाद करने के बजाय भजन-कीर्तन, ध्यान और मां लक्ष्मी के स्मरण में समय बिताया जा सकता है। श्रद्धा, स्वच्छता और सद्भाव के साथ मनाया गया यह पर्व परिवार में सुख-शांति और सकारात्मकता का संदेश देता है।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. Khabar Nest इसकी पुष्टि नहीं करता है.