UPI में बड़े बदलाव की तैयारी, 2,000 रुपये से अधिक के पेमेंट पर लग सकता है चार्ज, आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
देश में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके UPI को लेकर जल्द एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की दिशा में विचार कर रही है। हालांकि, आम लोगों के बीच होने वाले व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) ट्रांजैक्शन पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में इसका असर मुख्य रूप से बड़े मर्चेंट भुगतान पर देखने को मिल सकता है।
संसद में पेश बिल से खुला रास्ता
इस बदलाव की चर्चा तब तेज हुई जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल’ पेश किया। इस बिल में बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स पर नोटिफाइड इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड पर MDR लगाने से जुड़ी रोक हटाने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस व्यवस्था को कब से लागू किया जाएगा।
फिलहाल क्रेडिट और डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान पर MDR लिया जाता है, हालांकि अधिकांश व्यापारी इसे ग्राहकों से नहीं वसूलते। क्रेडिट कार्ड पर यह शुल्क ट्रांजैक्शन वैल्यू का 3 प्रतिशत तक हो सकता है, जबकि डेबिट कार्ड पर नियामकीय सीमा तय है। यदि सरकार UPI के लिए भी MDR लागू करती है, तो डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में यह एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव माना जाएगा।
सरकारी आकलन के अनुसार, 2,000 रुपये तक के UPI ट्रांजैक्शन कुल लेनदेन की संख्या का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा हैं। ऐसे में दूध, सब्जी, किराना, ऑटो-टैक्सी जैसी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए किए जाने वाले अधिकांश भुगतान इस प्रस्ताव से प्रभावित नहीं होंगे। जुलाई महीने में UPI के जरिए करीब 23.7 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 29.9 लाख करोड़ रुपये दर्ज की गई।
बड़े लेनदेन पर ही लागू हो सकता है MDR
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यदि MDR लागू भी किया जाता है तो यह केवल 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी भुगतान पर लागू होगा। प्रस्तावित दर 0.25 प्रतिशत से 0.40 प्रतिशत के बीच हो सकती है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि सभी व्यापारी इस अतिरिक्त शुल्क का बोझ ग्राहकों पर नहीं डालेंगे, क्योंकि शुल्क की राशि अपेक्षाकृत कम होगी।
सरकार तय कर सकती है अधिकतम शुल्क की सीमा
इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक सरकार MDR की राशि पर अधिकतम सीमा भी तय कर सकती है, ताकि व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि UPI ट्रांजैक्शन में क्रेडिट कार्ड की तरह फंडिंग कॉस्ट नहीं होती, इसलिए लागत की भरपाई के बाद शुल्क की एक तय सीमा रखना व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।
कार्ड पेमेंट की तरह UPI में भी बदल सकता है नियम
फिलहाल क्रेडिट और डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान पर MDR लिया जाता है, हालांकि अधिकांश व्यापारी इसे ग्राहकों से नहीं वसूलते। क्रेडिट कार्ड पर यह शुल्क ट्रांजैक्शन वैल्यू का 3 प्रतिशत तक हो सकता है, जबकि डेबिट कार्ड पर नियामकीय सीमा तय है। यदि सरकार UPI के लिए भी MDR लागू करती है, तो डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में यह एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव माना जाएगा।