युद्ध के बीच ट्रंप ने दिया 440 वोल्ट का झटका, भारत समेत 17 देशों पर लगाया 10% टैरिफ, जानें वजह
अमेरिका ने वैश्विक व्यापार नीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए भारत समेत 17 देशों से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला किया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन देशों से आने वाले कुछ सामानों के उत्पादन में जबरन मजदूरी (Forced Labour) का इस्तेमाल होने की आशंका है, इसलिए यह कदम मानवाधिकारों की रक्षा और निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर बातचीत भी जारी है, जिससे इस निर्णय की अहमियत और बढ़ गई है.
एक्ट की धारा 301 के तहत लागू हुआ नया टैरिफ
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत 60 देशों पर नए टैरिफ लागू करने की घोषणा की। उनके अनुसार इन देशों ने जबरन मजदूरी से तैयार किए गए उत्पादों के आयात पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण यह कदम उठाना जरूरी हो गया। अमेरिका का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य केवल व्यापारिक संतुलन बनाना नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना भी है।
भारत को मिली पहले से कम टैरिफ दर
इस नई व्यवस्था में भारत, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, बांग्लादेश और पाकिस्तान सहित कुल 17 देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले भारत 12.5 प्रतिशत टैरिफ वाले देशों की श्रेणी में शामिल था। यानी नई घोषणा के बाद भारत पर लागू होने वाली दर पहले की तुलना में कम हो गई है। अमेरिकी प्रशासन ने माना कि भारत ने हाल के महीनों में जबरन मजदूरी से जुड़े आयात को रोकने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिसके चलते उसे अपेक्षाकृत राहत मिली।
भारत ने बदली विदेश व्यापार नीति
अमेरिकी फेडरल नोटिस के मुताबिक जून में प्रस्तावित टैरिफ की घोषणा के बाद भारत ने अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन किया और 14 जून से जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लागू कर दिया। अमेरिका ने इस कदम को सकारात्मक माना है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि इन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। यही वजह है कि भारत को पूरी तरह टैरिफ से राहत नहीं मिली, बल्कि संशोधित दर के साथ इस सूची में रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदली रणनीति
ट्रंप प्रशासन ने यह नई जांच उस समय शुरू की जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए पुराने पारस्परिक टैरिफ को गैर-कानूनी करार दिया था। इसके बाद प्रशासन ने वैकल्पिक कानूनी प्रावधानों का सहारा लेते हुए ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत नई प्रक्रिया अपनाई। इसी के तहत सभी देशों पर लागू अस्थायी 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ की अवधि समाप्त होने से ठीक पहले यह नई घोषणा की गई, जिससे अमेरिका की नई व्यापार नीति को कानूनी आधार मिल गया।
व्यापार समझौते की बातचीत पर रहेगी नजर
भारत ने USTR की दोनों जांचों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा है कि ऐसे मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत बातचीत के जरिए किया जा सकता है। फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर चर्चा जारी है और ऐसे में यह फैसला आगे की वार्ताओं को प्रभावित कर सकता है। अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का व्यापार लगभग 141 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 87.3 अरब डॉलर का था। ऐसे में आने वाले समय में दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों और नई टैरिफ नीति पर वैश्विक बाजार की नजर बनी रहेगी।