हॉर्मुज में गहराया संकट, अमेरिका ने ईरान पर लगातार 13वीं रात किए हमले, तेल बाजार में मची हलचल
मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े भू-राजनीतिक संकट की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के सबसे अहम समुद्री मार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को चिंता में डाल दिया है। अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर लगातार 13वीं रात नए हवाई हमले किए हैं। वॉशिंगटन का दावा है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ईरान समर्थित गतिविधियों पर दबाव बनाना है। वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनियों के बीच दोनों देशों के बीच टकराव और गहराने के संकेत मिल रहे हैं।
अमेरिकी कार्रवाई के पीछे क्या है वजह?
अमेरिकी सेना के अनुसार गुरुवार शाम ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को धमकाने और समुद्री सुरक्षा को प्रभावित करने के आरोप हैं। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स को सुरक्षित रखना और ईरान को उसकी गतिविधियों के लिए जवाबदेह ठहराना है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल गुजरता है, इसलिए यहां बढ़ने वाला हर तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालता है।
तेल बाजार में बढ़ी हलचल
अमेरिका-ईरान तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी साफ दिखाई देने लगा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के साथ-साथ बाब अल-मंदेब मार्ग पर भी शिपिंग प्रभावित होने की आशंका के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि अमेरिकी क्रूड भी 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ता है या समुद्री मार्गों पर आवाजाही बाधित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिसका असर दुनिया भर में ईंधन, परिवहन और महंगाई पर देखने को मिल सकता है।