50 साल से कम उम्र वालों में बढ़ रहा कोलोरेक्टल कैंसर, जानिए कौन-से शुरुआती लक्षण नहीं करने चाहिए नजरअंदाज
एक नई रिसर्च ने युवाओं की सेहत को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कोलोरेक्टल कैंसर, यानी बड़ी आंत और मलाशय का कैंसर, अब 50 साल से कम उम्र के लोगों में कैंसर से होने वाली मौतों का प्रमुख कारण बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों में इसके मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कितनी तेजी से बढ़ रहे हैं मामले?
अमेरिकन कैंसर सोसाइटी की रिपोर्ट के मुताबिक, 20 से 49 साल के लोगों में इस बीमारी के मामले हर साल करीब 3 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं। 65 साल से कम उम्र के लोग अब कुल नए मामलों में लगभग 45 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं, जबकि 1995 में यह आंकड़ा 27 प्रतिशत था।
कौन से लक्षण नजरअंदाज नहीं करने चाहिए?
डॉक्टरों के मुताबिक मल त्याग की आदतों में लगातार बदलाव और मल में खून आना सबसे अहम शुरुआती संकेतों में शामिल हैं। इसके अलावा बार-बार रेक्टल ब्लीडिंग, काला या पतला मल, बिना वजह वजन घटना और लगातार थकान जैसे लक्षण भी गंभीर माने जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लक्षण दिखने पर उन्हें सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डॉक्टर क्या सलाह दे रहे हैं?
एलेगेनी हेल्थ नेटवर्क के डॉक्टर जेम्स मैककॉर्मिक के मुताबिक, मल में खून आना कोलोरेक्टल कैंसर का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। हालांकि इसका मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
कब से करानी चाहिए स्क्रीनिंग?
विशेषज्ञ आमतौर पर 45 साल की उम्र से नियमित स्क्रीनिंग शुरू करने की सलाह देते हैं। हालांकि अगर किसी व्यक्ति में पहले से लक्षण दिखाई दें, तो उम्र की परवाह किए बिना तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, 50 साल से कम उम्र के करीब 75 प्रतिशत मरीजों में बीमारी का पता एडवांस स्टेज में चलता है, जिससे इलाज मुश्किल हो सकता है।
क्या समय पर पहचान से बचाव संभव है?
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और शुरुआती पहचान से इस बीमारी का इलाज अधिक प्रभावी हो सकता है। इसलिए लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना और स्क्रीनिंग कराना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।