वजन कम करना सिर्फ इच्छाशक्ति का खेल नहीं, नई रिसर्च में सामने आई दिमाग की बड़ी भूमिका
लंबे समय से माना जाता रहा है कि वजन कम करना सिर्फ अनुशासन और इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है। “कम खाओ और ज्यादा चलो” जैसी सलाह आम तौर पर दी जाती है, लेकिन एक नई रिसर्च इस सोच को चुनौती देती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वजन घटने पर हमारा दिमाग इसे शरीर के लिए एक संभावित खतरे की तरह देख सकता है और शरीर को पहले वाले वजन की ओर लौटाने की कोशिश करता है।
आखिर दिमाग ऐसा क्यों करता है?
The Conversation में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, इंसानी दिमाग ऐसे दौर में विकसित हुआ था जब भोजन की कमी आम बात थी। उस समय शरीर में ऊर्जा का भंडार बचाकर रखना जीवित रहने के लिए जरूरी था। विशेषज्ञों का मानना है कि आज भी यही जैविक प्रणाली सक्रिय रहती है। हालांकि अब भोजन आसानी से उपलब्ध है और शारीरिक गतिविधि पहले की तुलना में कम हो गई है, इसलिए यही प्रणाली कई लोगों के लिए वजन घटाना मुश्किल बना सकती है।
वजन घटते ही शरीर में क्या बदलाव होते हैं?
जब कोई व्यक्ति वजन कम करता है, तो शरीर कई तरह की जैविक प्रतिक्रियाएं देने लगता है। भूख बढ़ाने वाला हार्मोन घ्रेलिन (Ghrelin) बढ़ सकता है, जबकि पेट भरा होने का संकेत देने वाला हार्मोन लेप्टिन (Leptin) कम हो सकता है। इसके साथ ही शरीर ऊर्जा खर्च करने की गति भी घटा सकता है, जिससे वजन कम बनाए रखना और चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
क्या दिमाग पुराने वजन को याद रखता है?
कुछ वैज्ञानिक इस प्रक्रिया को “सेट पॉइंट” सिद्धांत से जोड़कर समझाते हैं। इस सिद्धांत के अनुसार, शरीर किसी निश्चित वजन को सामान्य मान सकता है और वजन घटने के बाद उसी स्तर पर लौटने की कोशिश करता है। यही वजह हो सकती है कि कई लोगों का वजन डाइटिंग के बाद फिर से बढ़ जाता है।
क्या यह कमजोर इच्छाशक्ति की निशानी है?
रिसर्चर्स का कहना है कि वजन दोबारा बढ़ना हमेशा इच्छाशक्ति की कमी का संकेत नहीं होता। कई मामलों में इसके पीछे शरीर की प्राकृतिक जैविक प्रक्रियाएं काम करती हैं, जो ऊर्जा के भंडार को सुरक्षित रखने की कोशिश करती हैं।
दवाइयां और लाइफस्टाइल कितना असर डालती हैं?
Wegovy और Mounjaro जैसी दवाइयां भूख से जुड़े संकेतों को प्रभावित करके वजन घटाने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, इन्हें केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में दवा बंद करने के बाद वजन दोबारा बढ़ सकता है। इसलिए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और अच्छी मानसिक सेहत जैसे लंबे समय तक अपनाए जाने वाले बदलाव भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
समाधान क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि मोटापे को केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसके लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य स्तर पर भी कदम उठाने की जरूरत है, जैसे स्कूलों में पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देना, बच्चों को लक्षित जंक फूड मार्केटिंग पर नियंत्रण, पैदल चलने और साइकिल चलाने के अनुकूल शहरी ढांचा विकसित करना तथा लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।