Skip to content
-
Subscribe to our newsletter & never miss our best posts. Subscribe Now!
  • https://www.facebook.com/
  • https://twitter.com/
  • https://t.me/
  • https://www.instagram.com/
  • https://youtube.com/
Khabar Nest Khabar Nest
Khabar Nest Khabar Nest
  • Home
  • अजब-गजब
  • एजुकेशन
  • क्राइम
  • खेल
  • दुनिया
  • धर्म
  • बिजनेस
  • भारत
  • मनोरंजन
  • राज्य
  • लाइफस्टाइल
  • हेल्थ
  • Home
  • अजब-गजब
  • एजुकेशन
  • क्राइम
  • खेल
  • दुनिया
  • धर्म
  • बिजनेस
  • भारत
  • मनोरंजन
  • राज्य
  • लाइफस्टाइल
  • हेल्थ
Subscribe
Close

Search

दुनिया

Physics Nobel 2026: फ्रांसिस हाल्जेन को मिला फिजिक्स में नोबेल प्राइज, जानिए उनकी खोज

By dolly singh
October 6, 2026 2 Min Read
0

अंतरिक्ष से धरती तक पहुंचने वाले रहस्यमयी कणों को समझने की दिशा में शानदार काम करने वाले वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन को 2026 का फिजिक्स नोबेल पुरस्कार दिया गया है। बेल्जियम में जन्मे और अमेरिका में करियर बनाने वाले हाल्जेन को यह सम्मान आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी में उनके निर्णायक योगदान और खगोलीय स्रोतों से आने वाले हाई-एनर्जी न्यूट्रिनो की खोज के लिए मिला है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने 6 अक्टूबर 2026 को उनके नाम का ऐलान किया।

दिसंबर में स्टॉकहोम में मिलेगा नोबेल सम्मान

फ्रांसिस हाल्जेन को 10 दिसंबर 2026 को स्वीडन के स्टॉकहोम में आयोजित समारोह में नोबेल मेडल और डिप्लोमा दिया जाएगा। इस साल नोबेल पुरस्कार की राशि 12 मिलियन स्वीडिश क्रोना है। हाल्जेन यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन में प्रोफेसर हैं और आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी के निर्माण और वैज्ञानिक विकास में उनकी अहम भूमिका रही है।

साउथ पोल की बर्फ में खोजा अंतरिक्ष का सुराग

हाल्जेन ने यह विचार सामने रखा कि साउथ पोल की साफ और विशाल बर्फ का इस्तेमाल न्यूट्रिनो का पता लगाने के लिए किया जा सकता है। न्यूट्रिनो ऐसे बेहद छोटे और विद्युत रूप से उदासीन कण हैं, जो पदार्थ के बीच से लगभग बिना रुके गुजर सकते हैं। जब कोई न्यूट्रिनो बर्फ में मौजूद परमाणु के नाभिक से टकराता है तो बेहद हल्की चमक पैदा होती है, जिसे सेंसर की मदद से रिकॉर्ड किया जा सकता है। इसी वैज्ञानिक सोच ने आइसक्यूब वेधशाला के विकास का रास्ता तैयार किया।

एक क्यूबिक किलोमीटर बर्फ में छिपी है IceCube वेधशाला

आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी अंटार्कटिका के साउथ पोल में करीब एक क्यूबिक किलोमीटर बर्फ के भीतर फैली है और इसमें हजारों लाइट सेंसर लगाए गए हैं। इसकी मदद से वैज्ञानिक दूर ब्रह्मांड में होने वाली बेहद ऊर्जावान घटनाओं से निकलने वाले न्यूट्रिनो का अध्ययन कर सकते हैं। इन कणों से मिली जानकारी वैज्ञानिकों को उन हिंसक ब्रह्मांडीय परिस्थितियों को समझने में मदद करती है, जहां हाई-एनर्जी न्यूट्रिनो पैदा होते हैं। इससे ब्रह्मांड में मौजूद ऐसी घटनाओं का भी पता चल सकता है, जिन्हें पारंपरिक तरीकों से देखना मुश्किल है।

Tags:

Francis HalzenNoble Prize
Author

dolly singh

Follow Me
Other Articles
Previous

Vivo V80 की भारत में धमाकेदार एंट्री, 7,200mAh बैटरी और 50MP Zeiss कैमरा से है लैस, जानें कीमत

Next

कौन हैं एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित? जो होंगे भारतीय वायुसेना के नए चीफ, जानिए उनका करियर

No Comment! Be the first one.

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright 2026 — Khabar Nest. All rights reserved. Blogsy WordPress Theme