धरती के लिए ‘रेड अलर्ट’! जल्द 1.5°C पार कर सकता है तापमान, UN ने दी बड़ी चेतावनी
दुनिया का बढ़ता तापमान अब जलवायु परिवर्तन की उस अहम सीमा को पार करने की ओर बढ़ रहा है, जिसे लेकर वैज्ञानिक लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल टेम्प्रेचर जल्द ही 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा से ऊपर जा सकता है। इसके साथ ही अत्यधिक गर्मी, जंगल की आग, बाढ़ और मौसम की दूसरी चरम घटनाओं का खतरा और बढ़ने की आशंका है। इसका सीधा असर प्राकृतिक इकोसिस्टम पर पड़ सकता है, जबकि छोटे द्वीपीय विकासशील देशों के लिए अस्तित्व का संकट और गहरा सकता है।
ग्रीनहाउस गैसों में तुरंत कटौती की जरूरत
यूएन एनवायरनमेंट प्रोग्राम की ‘लिमिटिंग ओवरशूट’ रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु संकट को सीमित करने के लिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में तत्काल और लगातार कमी जरूरी है। रिपोर्ट के अनुसार, 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को पार करना जोखिम को बढ़ाएगा और तापमान में हर अतिरिक्त बढ़ोतरी के साथ इसके प्रभाव और गंभीर होते जाएंगे। हालांकि, रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि पेरिस समझौते के वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को हासिल करना अभी पूरी तरह संभव है, लेकिन इसके लिए देशों को मौजूदा प्रयासों से कहीं ज्यादा तेजी दिखानी होगी।
गुटेरेस बोले- आने वाले वक्त की चेतावनी हैं ये घटनाएं
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि इस साल की भीषण गर्मी, जंगलों में लगी आग और जानलेवा बाढ़ भविष्य के लिए स्पष्ट चेतावनी हैं। उन्होंने जोर दिया कि दुनिया को 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा से ऊपर जाने के समय और अवधि को जितना संभव हो, उतना कम रखना होगा। इसके लिए जलवायु लक्ष्यों को लेकर महत्वाकांक्षा बढ़ाने और नेट जीरो की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने की जरूरत है। खास तौर पर मीथेन समेत ग्रीनहाउस गैसों में लगातार कटौती पर जोर दिया गया है।
नेट नेगेटिव उत्सर्जन से तापमान घटाने पर जोर
रिपोर्ट में लंबे समय तक नेट नेगेटिव उत्सर्जन हासिल करने की जरूरत भी बताई गई है, जिसमें वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड हटाने की तकनीक अहम भूमिका निभा सकती है। यूएनईपी की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर इंगर एंडरसन ने कहा कि अब जलवायु कार्रवाई को तेज करने का समय आ गया है। उत्सर्जन कम करने के साथ-साथ देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता मजबूत करनी होगी। दुनिया के सामने चुनौती सिर्फ 1.5 डिग्री की सीमा को पार करने से बचने की नहीं, बल्कि अगर यह सीमा पार होती है तो उसके ऊपर बिताए जाने वाले समय को न्यूनतम रखने की भी है।