प्रोसेस्ड फूड से लेकर कोल्ड ड्रिंक तक… ये चीजें चुपचाप बढ़ा रही हैं यूरिक एसिड, ऐसे करें कंट्रोल
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में गलत खानपान, घंटों बैठकर काम करने की आदत और शारीरिक गतिविधियों की कमी कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे रही है। इन्हीं में से एक है यूरिक एसिड का बढ़ना, जो शुरुआत में मामूली लग सकता है, लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह जोड़ों में तेज दर्द, सूजन और गठिया जैसी गंभीर दिक्कतों का कारण बन सकता है। शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने के पीछे केवल एक वजह जिम्मेदार नहीं होती, बल्कि हमारी रोजमर्रा की कई आदतें मिलकर इस समस्या को बढ़ाती हैं। अच्छी बात यह है कि सही खानपान और संतुलित जीवनशैली अपनाकर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
किन वजहों से बढ़ने लगता है यूरिक एसिड
यूरिक एसिड तब बनता है जब शरीर प्यूरिन नामक तत्व को तोड़ता है। सामान्य स्थिति में किडनी इसे फिल्टर करके यूरिन के जरिए बाहर निकाल देती है, लेकिन जब इसका उत्पादन ज्यादा होने लगे या शरीर इसे बाहर निकालने में सक्षम न रहे, तब इसका स्तर बढ़ जाता है। रेड मीट, ऑर्गन मीट, सी-फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन इस समस्या को बढ़ा सकता है। वहीं फ्रुक्टोज से भरपूर कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस और ज्यादा मीठी चीजें भी यूरिक एसिड बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं। शराब, विशेषकर बीयर, इस प्रक्रिया को और खराब कर देती है क्योंकि यह शरीर से यूरिक एसिड बाहर निकलने की क्षमता को कम कर देती है।
रोजमर्रा की आदतें भी बन सकती हैं बड़ी वजह
सिर्फ खानपान ही नहीं, बल्कि जीवनशैली भी यूरिक एसिड के स्तर पर सीधा असर डालती है। दिनभर बैठे रहना, नियमित व्यायाम न करना और पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना किडनी के कामकाज को प्रभावित कर सकता है। जब शरीर को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, तब यूरिक एसिड आसानी से बाहर नहीं निकल पाता और धीरे-धीरे शरीर में जमा होने लगता है। इसके अलावा बढ़ता वजन और धीमा मेटाबॉलिज्म भी इस समस्या को बढ़ावा देते हैं। इसलिए सक्रिय जीवनशैली अपनाना और रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी माना जाता है।
ऐसे मिल सकता है फायदा
यूरिक एसिड को नियंत्रित रखने के लिए सबसे पहले अपनी डाइट में बदलाव करना जरूरी है। रेड मीट और ज्यादा प्यूरिन वाले खाद्य पदार्थों की जगह ताजे फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज को प्राथमिकता देनी चाहिए। खीरा, पपीता, सेब और अन्य फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ शरीर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। मीठे पेय पदार्थों की जगह नारियल पानी, सादा पानी या नींबू पानी जैसे हेल्दी विकल्प अपनाना बेहतर रहता है। इसके साथ ही रोजाना टहलना, योग या हल्की एक्सरसाइज करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और वजन भी नियंत्रित रहता है, जिससे यूरिक एसिड का स्तर संतुलित रखने में मदद मिल सकती है।
कब जरूरी हो जाती है डॉक्टर से जांच
अगर जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन, अकड़न या पैर के अंगूठे में अचानक तेज दर्द महसूस होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण बढ़े हुए यूरिक एसिड या गाउट की ओर इशारा कर सकते हैं। इस स्थिति में स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह से जांच कराना और उचित इलाज शुरू करना जरूरी है। समय पर पहचान, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर न केवल यूरिक एसिड को नियंत्रित किया जा सकता है, बल्कि भविष्य में होने वाली कई गंभीर जोड़ों की समस्याओं से भी बचाव संभव है।