फास्ट ट्रैक कोर्ट, 10 साल की जेल, 10 करोड़ तक जुर्माना… पेपर लीक से जुड़े संशोधन विधेयक में क्या-क्या?
देशभर में सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर उठते सवालों और नीट पेपर लीक जैसे मामलों के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को भारी हंगामे के बीच लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के लिए संशोधन विधेयक पेश किया गया। हालांकि विपक्ष के विरोध के कारण इस पर चर्चा नहीं हो सकी, लेकिन सरकार मंगलवार को इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा के बाद इसे पारित कराने की तैयारी में है। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य सिर्फ दोषियों को कड़ी सजा देना नहीं, बल्कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया को भी समयबद्ध बनाकर परीक्षा माफिया पर निर्णायक कार्रवाई करना है।
लोकसभा में पेश हुआ संशोधन विधेयक
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। इस विधेयक में पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी संगठित गड़बड़ियों के खिलाफ पहले से कहीं अधिक कठोर प्रावधान किए गए हैं। सरकार का कहना है कि नए कानून के जरिए न केवल अपराधियों को सख्त सजा मिलेगी, बल्कि मामलों की जांच और सुनवाई भी तय समय सीमा के भीतर पूरी होगी।
प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक और परीक्षा में बड़े स्तर पर गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ अधिकतम दस साल की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही गंभीर मामलों में दस करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। सरकार ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि जांच और अदालत में सुनवाई समानांतर रूप से चलेगी, ताकि मामलों का जल्द निपटारा हो सके। जांच दो महीने के भीतर और सुनवाई तीन महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
2024 के कानून की तुलना में क्या बदलेगा?
2024 के कानून में पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर तीन से पांच साल तक की सजा और अधिकतम दस लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान था। नए संशोधन में इसे बढ़ाकर पांच से दस साल की सजा और पचास लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव किया गया है।
संगठित अपराध के मामलों में भी कानून और कठोर बनाया गया है। पहले ऐसे मामलों में पांच से दस साल की जेल और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान था, जबकि नए विधेयक में न्यूनतम सजा सात साल और अधिकतम दस साल रखी गई है। वहीं जुर्माने की सीमा बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये तक करने का प्रस्ताव है।
समयबद्ध जांच और फास्ट ट्रैक कोर्ट पर जोर
नए विधेयक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें जांच और सुनवाई के लिए स्पष्ट समय सीमा तय की गई है। पहले ऐसे मामलों में जांच की कोई निश्चित अवधि तय नहीं थी और सुनवाई सामान्य अदालतों में होती थी। अब जांच दो महीने में पूरी करनी होगी और मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में तीन महीने के भीतर समाप्त करने का प्रावधान किया गया है।
स्पेशल टास्क फोर्स करेगी जांच
अब तक पेपर लीक जैसे मामलों की जांच मुख्य रूप से केंद्रीय जांच एजेंसियों के जरिए होती थी। प्रस्तावित संशोधन में ऐसे मामलों की जांच के लिए विशेष स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का मानना है कि विशेषज्ञ टीम के जरिए जांच अधिक प्रभावी और तेज होगी।
निजी एजेंसियों पर भी बढ़ेगी सख्ती
यदि कोई निजी एजेंसी परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी की दोषी पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी पहले से अधिक कठोर कार्रवाई होगी। 2024 के कानून में ऐसी एजेंसियों को चार साल तक ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर अब आठ साल करने का प्रस्ताव रखा गया है।
कानून के बाद भी परीक्षा माफिया बड़ी चुनौती
सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए नंदन नीलकेणि की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स भी गठित की है, जो भविष्य में सुधारों को लेकर अपनी सिफारिशें देगी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून को कठोर बना देने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। देश के कई हिस्सों में सक्रिय परीक्षा माफिया का नेटवर्क काफी गहरा है और उसे खत्म करने के लिए कानून के साथ-साथ तकनीकी निगरानी, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी होगा। ऐसे में आने वाले समय में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए कानून को जमीन पर पूरी सख्ती से लागू करना होगी।