लाल किला ब्लास्ट के पीछे था अल-कायदा का हाथ, UN रिपोर्ट ने खोली आतंकी साजिश
दिल्ली के लाल किले के पास नवंबर 2025 में हुए धमाके की जांच में अब एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय दावा सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट में इस हमले के लिए अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट यानी AQIS को जिम्मेदार बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि AQIS अब पहले की तरह केवल बिखरे हुए समूह के रूप में काम नहीं कर रहा, बल्कि दक्षिण एशिया में अपना नेटवर्क मजबूत करने के लिए छोटे-छोटे सेल और वित्तीय-लॉजिस्टिक्स तंत्र विकसित कर रहा है।
बांग्लादेश तक नेटवर्क फैलाने की कोशिश
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में AQIS की बढ़ती गतिविधियों को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक संगठन भारत में अपनी मौजूदगी के साथ-साथ बांग्लादेश में भी नए सेल तैयार करने की कोशिश कर रहा है। बड़े केंद्रीकृत ढांचे के बजाय छोटे और विकेंद्रीकृत समूहों में काम करने की रणनीति के कारण सुरक्षा एजेंसियों के लिए ऐसे नेटवर्क की पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
एनआईए की जांच में भी सामने आया था आतंकी मॉड्यूल
लाल किला धमाके की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए कर रही है। एजेंसी ने 14 मई को इस मामले में करीब 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें आरोपियों पर विस्फोटक उपकरण तैयार करने और उन्हें इस्तेमाल करने के लिए बेहद व्यवस्थित तरीके अपनाने का आरोप लगाया गया। चार्जशीट में एक आरोपी को अंसार गजवत-उल-हिंद के अंतरिम आतंकी मॉड्यूल का तकनीकी विशेषज्ञ बताया गया, जिसका संबंध AQIS से बताया गया है।
फरीदाबाद की यूनिवर्सिटी भी जांच के दायरे में
एनआईए की चार्जशीट में हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी का भी जिक्र है। जांच एजेंसी के मुताबिक आरोपी जासिर बिलाल वानी 2024-25 के दौरान कई बार विश्वविद्यालय परिसर गया था और वहां कुछ समय भी रहा। आरोप है कि उसका मकसद आतंकी साजिश के लिए तकनीकी सहायता हासिल करना था। जांच में विश्वविद्यालय से जुड़े तीन डॉक्टरों की कथित भूमिका भी सामने आई, जिसके बाद संस्थान की गतिविधियां जांच एजेंसियों की निगरानी में आ गईं।
उमर-उन-नबी समेत कई नाम जांच में
चार्जशीट के मुताबिक डॉक्टर अदील अहमद राथर ने जासिर की मुलाकात डॉ. उमर-उन-नबी से करवाई थी। उमर-उन-नबी को इस मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल किया गया है और उस पर विस्फोटक से भरी कार चलाने का आरोप है। एनआईए के अनुसार, 10 नवंबर 2025 को हुए धमाके में 11 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। मामले में जांच एजेंसी ने कई आरोपियों की कथित भूमिका और आपसी संपर्क का विस्तृत ब्योरा दिया है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के कथित दुरुपयोग पर भी सवाल
जांच में इंटरनेट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मंचों के कथित दुरुपयोग का पहलू भी सामने आया। एनआईए की चार्जशीट में दावा किया गया कि जासिर ने यूट्यूब और चैटजीपीटी के जरिए आतंकी गतिविधियों से जुड़ी तकनीकी जानकारी हासिल करने की कोशिश की थी। जांच एजेंसी के मुताबिक आरोपियों ने रॉकेट आधारित आईईडी पर भी काम किया और जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीगुंड जंगल में उनके परीक्षण का आरोप है। इस पूरे मामले ने आतंकवाद के लिए डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कथित इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।