UPI पर बड़ा बदलाव! 2,000 से ऊपर के पेमेंट पर लगेगा 0.4% MDR, यहां जानें पूरा नियम
यूपीआई से पेमेंट करने वालों के लिए भले ही कोई नया चार्ज नहीं आने वाला हो, लेकिन बड़े अमाउंट का डिजिटल पेमेंट लेने वाले मर्चेंट्स पर अब फीस का बोझ पड़ सकता है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI के कमर्शियल मॉडल में बदलाव का ऐलान किया है। नए नियम 15 अक्टूबर से लागू होंगे, जिसके तहत चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाया जाएगा। हालांकि, रोजमर्रा के ज्यादातर छोटे UPI पेमेंट इस चार्ज से बाहर रहेंगे।
2,000 रुपये तक के UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा MDR
नए फ्रेमवर्क के मुताबिक, 2,000 रुपये तक के P2M UPI ट्रांजैक्शन पर कोई MDR नहीं लिया जाएगा। NPCI के अनुसार, ऐसे पेमेंट UPI के P2M ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 95 फीसदी से ज्यादा हिस्सा हैं। वहीं, 2,000 रुपये से अधिक के सामान्य ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR तय किया गया है। इसके अलावा 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के पेमेंट पर अधिकतम 300 रुपये तक ही चार्ज लगेगा। यानी 1 लाख रुपये के UPI पेमेंट पर 400 रुपये नहीं, बल्कि अधिकतम 300 रुपये MDR देना होगा।
ग्राहक की जेब पर नहीं पड़ेगा असर
इस बदलाव का सीधा असर UPI से पेमेंट करने वाले ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। NPCI ने साफ किया है कि MDR का भुगतान मर्चेंट्स को करना होगा और इसे ग्राहक से अलग से वसूल नहीं किया जा सकेगा। P2P यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किया जाने वाला UPI ट्रांसफर भी पहले की तरह फ्री रहेगा। इसके साथ ही, छोटे व्यापारियों को भी राहत दी गई है। P2PM फ्रेमवर्क के तहत आने वाले ऐसे छोटे मर्चेंट्स, जो UPI QR के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक प्राप्त करते हैं, MDR के दायरे से बाहर रहेंगे।
3,000 से 1 लाख तक के पेमेंट पर कितना चार्ज?
नए नियमों को उदाहरण से समझें तो 3,000 रुपये के UPI पेमेंट पर 12 रुपये MDR और 50,000 रुपये के ट्रांजैक्शन पर 200 रुपये का चार्ज बनेगा। वहीं, 75,000 रुपये या इससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर अधिकतम 300 रुपये MDR लागू होगा। कुछ जरूरी सेक्टरों के लिए अलग दरें रखी गई हैं। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसे सेक्टर में 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी के बजाय 5 रुपये का फ्लैट MDR लगेगा। कैपिटल मार्केट से जुड़े पेमेंट पर 0.02 फीसदी MDR होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है।
UPI पर MDR लगाने की जरूरत क्यों पड़ी?
NPCI के मुताबिक, UPI का इस्तेमाल अब इतने बड़े पैमाने पर हो रहा है कि इसके संचालन और सुरक्षा पर भारी खर्च आता है। सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंडविड्थ, फ्रॉड रोकने, साइबर सिक्योरिटी और टेक्निकल सपोर्ट जैसी व्यवस्थाओं को बनाए रखने में काफी लागत आती है। इंडस्ट्री के अनुमान के अनुसार, UPI ऑपरेशन को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने का सालाना खर्च करीब 20,000 करोड़ रुपये है। NPCI का कहना है कि सरकारी सब्सिडी डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए शुरुआती दौर का सपोर्ट थी, लेकिन लंबे समय तक इसी पर निर्भर रहना टिकाऊ मॉडल नहीं है।
अगस्त में UPI ने बनाया बड़ा रिकॉर्ड
UPI का बढ़ता इस्तेमाल इस पूरे बदलाव की वजह को समझने में मदद करता है। अगस्त 2026 में UPI के जरिए 2,451 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 29.9 लाख करोड़ रुपये रही। NPCI अब छोटे व्यापारियों के लिए एक खास फंड बनाने का प्रस्ताव भी तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य टियर 3 से 6 सेंटरों, पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे क्षेत्रों में डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है। टियर 1 और 2 शहरों में नोटिफाइड सरकारी योजनाओं को भी इस फंड से सपोर्ट देने की योजना है, जिसकी विस्तृत रूपरेखा RBI के साथ बातचीत के बाद तीन महीने के भीतर तैयार होने की उम्मीद है।