SC का बड़ा फैसला; दिल्ली समेत 5 राज्यों में 129 FIR रद्द, 5 सितंबर का CJP मार्च भी टला
राजधानी दिल्ली समेत चार राज्यों में छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े 129 एफआईआर अब कानूनी तौर पर खत्म हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 1 सितंबर को अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए इन मामलों को रद्द करने की मंजूरी दे दी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि ये एफआईआर अब इतिहास का हिस्सा हैं और इनके आधार पर आगे कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।
आंदोलन खत्म करने के वादे पर अमल
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 25 जुलाई को आंदोलन समाप्त करने के बदले छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का आश्वासन दिया गया था। दिल्ली से जुड़े मामलों की सूची कोर्ट के सामने रखी गई। इसके बाद बिहार, महाराष्ट्र, असम और पश्चिम बंगाल की सरकारों ने भी अपने-अपने राज्यों में दर्ज मामलों को वापस लेने के लिए याचिकाएं दाखिल कीं।
129 मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर
चार राज्यों की ओर से भी केस वापस लेने की मांग रखी गई, जिसके बाद दिल्ली समेत संबंधित राज्यों में दर्ज कुल 129 एफआईआर को खत्म करने का रास्ता साफ हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर छात्रों के आंदोलन से जुड़े किसी अन्य राज्य में मामले दर्ज हैं, तो उनकी जांच को आगे नहीं बढ़ाया जाए। कोर्ट ने अपने विशेष अधिकार अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए इस मामले में व्यापक राहत दी।
2873 लोगों से जुड़ी नई FIR पर विवाद
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से 2873 लोगों के खिलाफ शारीरिक चोट और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों से जुड़ी एक नई एफआईआर का मुद्दा भी सामने आया। चार राज्यों ने भी इसी तरह की अर्जियां दाखिल की हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से संबंधित पैराग्राफ पढ़ने को कहा, जिसमें भविष्य में नई एफआईआर न दर्ज करने और 2873 लोगों के खिलाफ दर्ज मामले का उल्लेख था। हालांकि, कुछ वकीलों ने इसका विरोध करते हुए सभी आरोपियों का पूरा विवरण कोर्ट में रखने की मांग की।
मृत छात्रों के मुआवजे पर तीन महीने में फैसला
सुनवाई में उन छात्रों के मुआवजे का मुद्दा भी उठा, जिनकी प्रदर्शन के दौरान मौत हुई थी। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सरकार अपने उस आश्वासन पर कायम है, लेकिन मुआवजे के तौर-तरीके तय करने में कुछ समय लगेगा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इसके लिए तीन महीने का वक्त मांगा। उनका कहना था कि अलग-अलग परीक्षाओं और परिस्थितियों को देखते हुए सरकार को उचित प्रक्रिया तैयार करनी होगी।
5 सितंबर का मार्च किया गया रद्द
एफआईआर रद्द होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च को रद्द करने का फैसला किया है। इस फैसले के साथ आंदोलन से जुड़े एक बड़े विवाद का फिलहाल समाधान होता दिखाई दे रहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब दोनों पक्ष किसी समाधान के लिए तैयार हों, तो किसी भी मामले को सुलझाया जा सकता है।