अमेरिका ने ईरान पर बरसाए बम, IRGC ने US के ठिकानों पर दागीं मिसाइलें; मिडिल ईस्ट में फिर छिड़ी जंग!
पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। अमेरिकी सेना ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कई ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके बाद ईरान की ओर से भी जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमलों के दावे सामने आए हैं। इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
ईरान में शादी की खुशियां मातम में बदलीं
अमेरिकी हमलों के बीच ईरान के दक्षिणी बंदरगाह शहर सिरिक से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई। ईरान के मुताबिक, अमेरिकी हमले में कम से कम चार लोगों की मौत हुई है, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। सरकारी न्यूज एजेंसी फार्स के अनुसार, सिरिक के कुहेस्तक इलाके में एक घर को निशाना बनाया गया, जहां उस समय शादी समारोह चल रहा था।
ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
इस हमले को लेकर ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने अमेरिका को कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान इन हमलों का सख्ती से जवाब देगा। बाकाई ने उन देशों और लोगों पर भी निशाना साधा जो इस कार्रवाई पर चुप हैं। उनका कहना था कि अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठाने से उसे बढ़ावा मिलता है और आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
अमेरिका ने किन ठिकानों को बनाया निशाना?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के मुताबिक, ऑपरेशन में IRGC के कई अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, रडार साइट्स, समुद्री ठिकाने, समुद्र में माइन बिछाने की क्षमता रखने वाले अड्डे और कम्युनिकेशन साइट्स शामिल हैं। CENTCOM ने सोशल मीडिया पर हमले से जुड़ी कुछ वीडियो क्लिप भी जारी की हैं, जिनमें सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई दिखाई गई है।
50 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक अलर्ट
CENTCOM ने कहा है कि पश्चिम एशिया में इस समय 50 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। कमांड के मुताबिक, अमेरिकी सैनिक पूरी तरह सतर्क हैं और कमांडर इन चीफ के आदेश पर किसी भी ऑपरेशन के लिए तैयार हैं। ऐसे में ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद पूरे क्षेत्र में किसी बड़े सैन्य विस्तार की आशंका भी बढ़ गई है।
ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकाने पर दागीं मिसाइलें
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की IRGC ने जवाबी हमला करने का दावा किया। ईरान के मुताबिक, जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी मरीन के कैंप टिटिन को निशाना बनाकर भारी बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। IRGC ने दावा किया कि हमले में अमेरिकी सैनिकों, सैन्य ठिकानों और एक अटैक हेलिकॉप्टर को निशाना बनाया गया। यह कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई चेतावनी के बाद हुई है।
जॉर्डन ने 13 में से 10 मिसाइलें रोकीं
जॉर्डन की सेना ने ईरानी मिसाइल हमले को काफी हद तक नाकाम करने का दावा किया है। जॉर्डन के अनुसार, ईरान की ओर से कुल 13 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, जिनमें से 10 को एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही रोक दिया। बाकी तीन मिसाइलें आबादी से दूर खाली इलाकों में गिरीं। इस हमले के बाद क्षेत्र में एयर डिफेंस सिस्टम को और ज्यादा अलर्ट कर दिया गया है।
बहरीन के एयरबेस पर भी हमले का दावा
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA ने दावा किया कि IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस को भी निशाना बनाया। एजेंसी के मुताबिक, वहां RQ-4 और MQ-9 ड्रोन के हैंगर पर हमला किया गया, जिसमें कई ड्रोन नष्ट होने का दावा किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बहरीन और कुवैत में भी बढ़ा खतरा
IRNA के अनुसार, ईरानी सेना ने बहरीन के शेख ईसा एयरबेस पर भी बड़ी संख्या में ड्रोन से हमला किया। दावा है कि यहां रडार सिस्टम और अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को निशाना बनाया गया। इसके बाद बहरीन के गृह मंत्रालय ने लोगों से शांत रहने और नजदीकी सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की। वहीं कुवैत की एयर डिफेंस द्वारा ईरानी ड्रोन हमलों को रोकने की खबरें भी सामने आई हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ते टकराव ने बढ़ाई दुनिया की चिंता
अमेरिकी हमले के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई के दावों ने साफ कर दिया है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष का दायरा बढ़ने का खतरा बना हुआ है। जॉर्डन, बहरीन और कुवैत तक हमलों की आंच पहुंचने के दावों के बीच क्षेत्र के अमेरिकी सैन्य ठिकाने हाई अलर्ट पर हैं। अगर दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रहती है, तो इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित रहने के बजाय वैश्विक सुरक्षा, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।